#MeToo : अकबर ने किया प्रिया रमानी पर मानहानि का मुकदमा, इस्तीफे की अटकलों को खारिज कर कार्यालय गये


(Photo: IANS)

नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री एम. जे. अकबर ने सोमवार को पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया। रमानी ने मंत्री पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। अकबर पर उनके साथ काम करने वाली कई महिला पत्रकारों ने उस समय यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया जब वह संपादक हुआ करते थे। अकबर ने सभी आरोपों को झूठा और निराधारा बताया है।

अकबर ने पटियाला हाउस अदालत में अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

अकबर ने भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि) के तहत रमानी पर मुकदमा चलाने की मांग की है।

अकबर ने आरोप लगाया है कि रमानी ने पूर्णतया झूठे व ओछे बयान द्वारा जानबूझकर, सोच समझकर, स्वेच्छा से और दुर्भावनापूर्वक उन्हें बदनाम किया है, जिसने राजनीतिक गलियारे, मीडिया, दोस्तों, परिवार, सहकर्मियों और समाज में व्यापक रूप से उनकी साख और इज्जत को नुकसान पहुंचाया है।

अधिवक्ता संदीप कपूर द्वारा दाखिल अर्जी में कहा गया है, “आरोपी द्वारा शिकायतकर्ता (अकबर) के खिलाफ लगाए गए अपमानपूर्ण आरोप प्रथमदृष्टया अपमान सूचक हैं और इन्होंने न केवल शिकायतकर्ता की उनके समाज व राजीतिक गलियारे में बरसों की मेहनत व मशक्कत के बाद अर्जित की गई उनकी साख और इज्जत को नुकसान पहुंचाया है बल्कि समुदाय, दोस्तों, परिवार और सहकर्मियों में उनके निजी सम्मान को भी प्रभावित किया है। इससे उन्हें अपूरणीय क्षति और अत्यधिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है।”

इस्तीफे की अटकलें कीं खारिज, मंत्रालय पहुंचे

वहीं एमजे अकबर इस्तीफा नहीं देने पर जारी विवाद के बीच वह सोमवार को सामान्य दिनों की तरह ही अपने ऑफिस पहुंचे। ऑफिस के लिए रवाना होते वक्त अकबर अपने सरकारी आवास के बाहर जमे पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से बचते नजर आए। अकबर रविवार को ही नाइजीरिया से भारत लौटे हैं। भारत लौटने के बाद उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है। उन्होंने कहा कि वह उन महिलाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने वाले हैं जिन्होंने उनके खिलाफ आरोप लगाए हैं।

नाइजीरिया से उनके वापस लौटने के कुछ देर बाद खबर आई थी कि उन्होंने ईमेल के जरिए अपना इस्तीफा भेज दिया है। हालांकि बाद में उन्होंने आरोपों को झूठा बताते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। एमजे अकबर पर करीब 15 महिला पत्रकारों ने यौन शोषण और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को राजनीतिक करार देते हुए अकबर ने कहा कि अगले साल होने वाले चुनावों की वजह से उन पर इस तरह के आरोप लगाया जा रहे हैं। इस तरह के आरोप सामने आते ही विपक्षी पार्टियां लगातार अकबर के इस्तीफे की मांग कर रही हैं।

अकबर ने रविवार को अपनी सफाई देते हुए कहा, मुझ पर लगे आरोप गलत, मनगढ़ंत और आधारहीन हैं। इससे मेरी इमेज को बहुत नुकसान पहुंचा है। आम चुनावों से कुछ महीने पहले ही ये तूफान क्यों उठा है? क्या यह कोई एजेंडा है? आप जज हैं। ये झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं, ताकि मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा, झूठ के पांव नहीं होते, लेकिन इसमें जहर होता है। जिससे उन्माद फैलाया जा सकता है। ये आरोप परेशान करने वाले हैं।

कांग्रेस का पलटवार

एमजे अकबर के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने सवाल किया, अकबर कौन से जनाधार वाले नेता हैं और एक राजनेता के तौर पर उनकी छवि कुछ भी नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने कहा, अकबर पर लगे आरोपों के पीछे कोई भी राजनीतिक साजिश नहीं है और अगर भाजपा इन्हें कैबिनेट से बाहर नहीं करती है तो उसे महंगा पड़ेगा।

रामदास अठावले ने कहा, यदि आरोप सच, तो अकबर दें इस्तीफा

(Photo: IANS/PIB)

उधर केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा है कि अगर केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर के खिलाफ लगे यौन दुराचार के आरोप सच साबित होते हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। एक संवाददाता सम्मेलन में सवालों के जवाब में उन्होंने यह भी चेताया कि ‘मी टू’ अभियान को निराधार आरोप लगाने का मंच न बना लिया जाए।

उन्होंने कहा, अगर कोई महिला का अपमान कर रहा है तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। अगर एमजे अकबर एवं नाना पाटेकर जैसी हस्तियां भी दोषी पाई जाएं जो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।’ मंत्री ने कहा,

अगर कोई दोषी है, तो उस व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन मुझे ऐसी आशंका है कि इस मंच का इस्तेमाल किसी को झूठे मामले में फंसाने के लिए भी किया जा सकता है। पुलिस को ऐसे आरोपों की पुष्टि करनी चाहिए।’

(ईएमएस, आईएएनएस एवं अन्य इनपुट के साथ।)