मिराज-2000 का चयन रणनीति का हिस्सा!


भारतीय वायुसेना ने मंगलवार सुबह पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जैश के ठिकानों पर जमकर बमबारी की।
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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना ने मंगलवार सुबह पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में जैश के ठिकानों पर जमकर बमबारी की। इस दौरान कई आतंकी कैंप के नष्ट होने की खबर है। भारतीय वायुसेना के १२ मिराज-२००० विमानों के समूह ने जैश के कैंप पर १००० किलोग्राम के बम गिराए। इस हमले के लिए एयरफोर्स द्वारा मिराज-२००० विमानों का चयन करना भी एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा था। भारतीय वायुसेना की रीढ़ समझे जाने वाले मिराज- २००० लड़ाकू विमान डीप पेनिट्रेशन स्ट्राइक करने की क्षमता रखते हैं। इसका मतलब यह लड़ाकू विमान अंदर तक घुसकर मार करने में सक्षम है। यह प्लेन किसी भी देश में भीतर तक जाकर बिना राडार की पकड़ में आए टारगेट को ध्वस्त कर सकता है। कुछ ही दिन पहले पोखरण में हुए वायुशक्ति २०१९ में मिराज ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया था।
मिराज-२००० विमान फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एविएशन द्वारा बनाया है। यह वही कंपनी है जिसने राफेल को बनाया है जिसे लेकर भारतीय राजनीति आज भी गर्माई हुई है। मिराज-२००० चौथी जेनरेशन का मल्टीरोल, सिंगल इंजन लड़ाकू विमान है। इसकी पहली उड़ान साल १९७० में आयोजित की गई थी। यह फाइटर प्लेन अभी लगभग नौ देशो में अपनी सेवाएं दे रहा है।

मिराज २००० में हथियारों को ले जाने के लिए नौ हार्डपॉइंट दिए गए हैं। जिसमें पांच प्लेन के नीचे और दो दोनों तरफ के पंखों पर दिया है। सिंगल-सीट संस्करण भी दो आंतरिक हैवी फायरिंग करने वाली ३० मिमी बंदूखों से लैस है। हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों में मल्टीगेट एयर-टू-एयर इंटरसेप्ट और कॉम्बैट मिसाइलें शामिल है। इसके अलावा भी यह कई प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है।
पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा उस समय के सबसे बेहतरीन विमान एफ-१६ को दिए जाने के बाद भारत ने फ्रांस के मिराज २००० की खरीद के संबंध में बातचीत शुरू कर दी थी। अक्टूबर १९८२ में भारत ने ३६ सिंगल-सीट मिराज-२०००प्े और ४ ट्विन-सीट मिराज-२००० ऊपर के लिए डसॉल्ट को ऑर्डर दिया।

पहले, १५० विमानों की खरीद के लिए फ्रांस के साथ बातचीत चल रही थी, जिसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ संयुक्त उत्पादन के तहत होता। भारत के पास लाइसेंस के तहत कई मिराज २००० का उत्पादन करने का विकल्प था जो बाद में सोवियत संघ के साथ देश के घनिष्ठ संबंध के कारण खत्म हो गया था।

२९ जून १९८५ को नंबर ७ स्क्वाड्रन के पहले सात विमानों की डिलीवरी के साथ भारतीय वायु सेना इस प्रकार का पहला विदेशी सेना बनी जिसके पास मिराज २००० विमान थे। शुरूआत में इस विमान में स्नेक्मा एम ५३-५ इंजन थे जिसे बाद में एम ५३ पी-२ इंजन से बदल दिया है। मिराज २००० में परिवर्तित होने वाला दूसरा स्क्वाड्रन नंबर १ स्क्वाड्रन था। जिसे द टाइगर्स के नाम से जाना जाता है। इसे १९८६ में औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है।

–  ईएमएस