हिंदू राष्ट्र को लेकर मेघालय उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर सियासी हंगामा


हिंदू राष्ट्र को लेकर मेघालय उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर सियासी हंगामा खड़ा हो गया है।
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नई दिल्ली। हिंदू राष्ट्र को लेकर मेघालय उच्च न्यायालय की टिप्पणी पर सियासी हंगामा खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के अलावा शिवसेना के सांसद संजय राउत ने भी विभाजन के समय भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिए जाने की बात का समर्थन किया है। मेघालय हाईकोर्ट के जस्टिस एसआर सेन ने एक केस की सुनवाई के दौरान बुधवार को कहा था कि विभाजन के समय भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन हम धर्मनिरपेक्ष बने रहे। जस्टिस की टिप्पणी पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, ‘मेघालय हाई कोर्ट ने जो कहा है उस पर मैं यह कह सकता हूं कि मैं कोर्ट की भूमिका का स्वागत करता हूं। हमारी पार्टी हमेशा से कहती आई है कि यह हिंदू राष्ट्र है। ऐसा इसलिए क्योंकि 1947 में देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था।’

उन्होंने आगे कहा कि हमारे मुसलमान भाई चाहते थे कि उनके लिए अलग राष्ट्र बने तो मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बनाया गया और जो बचा है वह हिंदुस्तान, हिंदू राष्ट्र है। उसमें कोर्ट और किसी की सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। केंद्र में सत्ता पर काबिज भाजपा का भी यही एजेंडा रहा है। भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का हमारा भी यही एजेंडा है। राउत ने कहा कि हिंदू राष्ट्र का मतलब तालिबानी राष्ट्र नहीं है। हिंदू राष्ट्र का मतलब बेहतर सेकुलर राष्ट्र होता है। शिवसेना सांसद ने ओवैसी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ओवैसी साहब की जो पार्टी है वह मुस्लिम लीग की तरह है। यह वही मुस्लिम लीग है जिसने पाकिस्तान बनाने के लिए देश में खून खराबा किया और देश का विभाजन कराया।
जस्टिस सेन के हिंदू राष्ट्र संबंधी बयान पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी समर्थन करते हुए कहा, ‘मैं उनकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं। मैं तो साधुवाद देता हूं, धन्यवाद देता हूं। किसी संवैधानिक पर पद पर बैठे व्यक्ति ने ऐसा टिप्पणी की है जो आज देश के अधिसंख्य नागरिक महसूस कर रहे हैं।’

दूसरी ओर, राज्यसभा सांसद और संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है। भारत धर्मनिरपेक्ष इसलिए है क्योंकि यहां पर हिंदू समाज है जिस दिन हिंदू समाज अल्पसंख्यक हो जाएगा, उस दिन लोकतंत्र और दूसरी चीजों पर दिक्कत हो जाएगी। सिन्हा ने कहा कि जिस प्रकार से आजादी के बाद राजनीतिक दलों ने तुष्टीकरण की नीति के द्वारा लोकतंत्र में जनसांख्यिकी असंतुलन बढ़ाने की कोशिश की थी उसका दुष्परिणाम असम में और बंगाल की कुछ क्षेत्रों में और बिहार के क्षेत्रों में दिखाई पड़ रहा है। भारत में जिस दिन हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएगा उस दिन लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती। ओवैसी पर उन्होंने कहा कि वह आईएसआईएस के भारत में पोस्टल एड्रेस हैं।

इसी मुद्दे पर एनसीपी नेता माजिद मेमन ने कहा कि विभाजन के वक्त क्या हालात थे। यह बात जस्टिस महोदय को जानना चाहिए। लगता है कि उन्होंने इतिहास पढ़ा ही नहीं है। विभाजन के समय मुसलमानों की जो घनी आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोग वो जिन्ना की अगुवाई में पाकिस्तान जाकर बस गए। जो करोड़ों की तादात में मुसलमान उस वक्त पाकिस्तान नहीं गए उसकी सिर्फ यही वजह थी कि भारत एक सेकुलर मुल्क और सेकुलर संविधान के तहत चलने वाला था।

उन्होंने कहा कि इस तरीके की जस्टिस सेन को बातें नहीं करनी चाहिए। मुझे बहुत दुख होता है किसी जज का माइंडसेट इस तरीके का है। उन्होंने संविधान की शपथ ली है संविधान की शपथ लेने वाले जज को इस्तीफा देना चाहिए। मेघालय हाई कोर्ट के जस्टिस एसआर सेन ने पीआरसी (स्थायी निवासी प्रमाणपत्र) को लेकर एक मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी। जस्टिस सेन ने कहा था कि किसी को भी भारत को दूसरा इस्लामिक देश बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो भारत और दुनिया के लिए यह सबसे खराब दिन होगा। उन्हें विश्वास है कि पीएम मोदी की सरकार इस चीज को समझेगी।

– ईएमएस