कई सरकारें आई गई पर 18 वर्षों से जारी है हड़ताल, सुध लेने नहीं आते नेता-प्रशासन


राजस्थान में कई सरकारें 18 साल की आईं गईं पर राजधानी जयपुर में एक ऐसा धरना चल रहा है जिसकी सुध किसी ने भी नहीं ली।
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जयपुर। राजस्थान में कई सरकारें 18 साल की आईं गईं पर राजधानी जयपुर में एक ऐसा धरना चल रहा है जिसकी सुध किसी ने भी नहीं ली। इस धरने को देखकर हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि ये कौन लोग हैं जो सुबह 9 बजे आकर बैठ जाते हैं और शाम 5 बजे तक बैठे रहते हैं। अगर पिछले 18 साल से कोई इस रास्ते से रोजाना गुजरता हो तो उसने देखा होगा कि किस तरह से ये लोग पिछले 18 सालों में जवानी की दहलीज से बुढ़ापे की सांझ तक आ पहुंचे हैं, लेकिन उन्होंने इंसाफ की उम्मीद नहीं छोड़े हैं। यह कहानी है जयपुर के किसी जमाने के सबसे मशहूर उद्योग जयपुर मेटल की। जयपुर मेटल कारखाना के श्रमिक अपने धरने के 5,000 दिन पूरा कर चुके हैं। अनगिनत ज्ञापन और लगातार प्रदर्शनों के क्रम के बावजूद इन श्रमिकों को अभी तक इंसाफ नहीं मिला है। इनका आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना को अचानक 30 सितंबर 2000 को कारखाने पर ताला लगा दिया गया था। तब से यहां काम करने वाले श्रमिक बेरोजगार बैठे हैं और उनके परिवार तिल तिल कर मर रहा है। कारखाने में उस वक्त 1,558 मजदूर कार्यरत थे और आज की तारीख में 405 मजदूरों की मौत हो चुकी है। 12 से ज्यादा मजदूर तो आत्महत्या कर चुके हैं जबकि चार मजदूर आर्थिक संकट की वजह से घर छोडक़र जा चुके हैं।

इनका आरोप है कि कारखाने की आधी से ज्यादा जमीन को सरकारी अफसरों ने कौडय़िों के भाव बेच दिया जिस पर विशाल आवासीय परिसर बन गया है, लेकिन उस पैसे से कारखाने को चालू नहीं किया गया। धरने के 5000 दिन पूरा होने पर मजदूर नेता कन्हैया लाल शर्मा और तेज राम मीणा के नेतृत्व में मजदूरों ने परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास से मिलकर मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के प्रतिनिधि को सुनवाई के लिए तुरंत मामले को सौंपा जाए। हड़तालियों की मांग हैं कि कारखाने को फिर से चालू किया जाए।

2005 में इन श्रमिकों को आखिरी बार 11 महीने का वेतन मिला था और तब सरकार ने इसे चलाने की कोशिशों को तहत एक निजी कंपनी से इसे चलाने का करार भी किया था, लेकिन यह नहीं चल पाया। कारखाना जब बंद हो रहा था तब तत्कालीन मुख्यमंत्री और पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत ने कारखाने को चलाने के लिए 20 करोड़ जारी किए थे, लेकिन वह भी राशि आज तक जारी नहीं हो पाई है। जयपुर मेटल कारखाना 56,000 वर्ग गज जमीन पर बना है और जमीन की मौजूदा कीमत करीब 3 अरब की है। मजदूरों का कहना है कि कारखाने के पास इतनी संपत्ति है कि इसे फिर से चालू किया जा सकता है और अगर नहीं किया जाता है तो कम से कम बाकी बचे हुए जो मजदूर हैं उनके वेतन और पेंशन का भुगतान कर दिया जाए।

– ईएमएस