ममता बनर्जी की बायोपिक ‘बाघिनी’ को लेकर सीपीएम, भाजपा ने खटखटाया ईसी का दरवाजा


फिल्म 'बाघिनी' को ममता बनर्जी की बायोपिक माना जा रहा है और सीपीएम और भाजपा ने चुनाव आयोग में आपत्ति दर्ज कराई है।
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को लेकर अब एक नया तूफान खड़ा हो गया है दरअसल फिल्म ‘बाघिनी’ को उनकी बायोपिक माना जा रहा है और सीपीएम और भाजपा ने इसकी रिलीज को लेकर चुनाव आयोग में आपत्ति दर्ज कराई है। रबर की चप्पलें, हैंडलूम की सफेद साड़ी, तेज आवाज और आक्रामक अंदाज। देखकर कोई कह नहीं सकता कि फिल्म ‘बाघिनी’ में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का किरदार नहीं है, लेकिन फिल्म के मेकर्स का कहना है कि यहां बात ममता की नहीं बल्कि इंदिरा बंदोपाध्याय की हो रही है। फिल्म लोकसभा चुनावों के बीच 3 मई को रिलीज होनी है जिसे लेकर विवाद हो गया है। फिल्म के डायरेक्टर और प्रड्यूसर इसे बायॉपिक मानने से साफ इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि फिल्म ममता के संघर्षों से प्रेरणा लेकर महिला सशक्तीकरण के नजरिये से बनाई गई है।

फिल्म ममता के बचपन से लेकर राज्य के 34 साल के लेफ्ट राज को हटाकर राज्य की पहली महिला सीएम बनने की कहानी है। फिल्म को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई है। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलकर फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने इसे प्रॉपेगैंडा बताया है। भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष जॉय प्रकाश मजूमदार ने भी आयोग को खत लिखा है और पीएम नरेंद्र मोदी पर बनी फिल्म की तरह ममता की फिल्म का रिव्यू करने की मांग की है।

हालांकि, तृणमूल का कहना है कि पार्टी का फिल्म से कोई लेना-देना नहीं है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्य सभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि उन्हें दोनों के बीच कोई संबंध नहीं दिखता। फिल्म की प्रड्यूसर पिंकी पॉल मोंडल और डायरेक्टर नेहल दत्ता ने इस बात का खंडन किया है कि फिल्म का कॉन्टेंट आक्रामक या राजनीति से प्रेरित है। मोंडल का कहना है कि फिल्म के लिए ममता बनर्जी से मुलाकात नहीं की गई। उन्होंने दावा किया है कि फिल्म न्यूज क्लिप्स और ममता की बायोग्राफी के आधार पर बनाई गई है।

फिल्ममेकर्स का कहना है कि ममता सिर्फ बंगाल की नहीं बल्कि देश की एक आइकॉन हैं। उन्होंने फिल्म के पीछे उद्देश्य सामाजिक संदेश देना बताया है। मोंडल का कहना है कि फिल्म 2016 में बनाई गई थी और अब जाकर सेंसर बोर्ड ने यू सर्टिफिकेट के साथ उसे क्लियर किया है। इसलिए वे अब इसे रिलीज करने में देरी नहीं करना चाहतीं। नेहल ने साफ किया है कि फिल्म का मकसद किसी राजनीतिक दल को हाइलाइट करना नहीं और न ही किसी पार्टी पर हमला करना।

– ईएमएस