कोलकाता पुल हादसा : मलबे हटाने का काम तेजी से


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राहत और बचाव कार्य में लगी सेना और एनडीआरएफ

मलबे में दब कर एक की मौत, 21 घायल

कोलकाता । पश्चिम बंगाल के कोलकाता के माझेरहाट इलाके में 40 साल पुराना पुल ढहने से एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि 21 लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो की हालत गंभीर है।

बचाव अभियान में जुटे कर्मचारियों ने बताया कि मलबे के नीचे और लोग दबे हो सकते हैं। इन्हें निकालने के लिए बचाव अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही सफाई का काम भी जारी है। उल्लेखनीय है कि पिछले छह सालों की अवधि में कोलकाता में करीब तीन पुल गिर चुके हैं।

इससे पहले 2016 में कोलकाता के बड़ा बाजार इलाके में पुल गिरा था जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी। मंगलवार को कोलकाता में हुए इस भीषण पुल हादसे में बड़ी लापरवाही सामने आई है। बताया जाता है कि पुलिस ने पहले ही पीडब्ल्यूडी को पुल की स्थिति के बारे में आगाह कर दिया था, लेकिन समय रहते पुल की मरम्मत की पहल नहीं की गई। उधर, इस मुद्दे पर अब राजनीति शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।

हादसे पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा पुल के लिए बेहतर रखरखाव की जरूरत थी। कुछ समय पहले तक यहां पर एक गड्ढे की रिपोर्ट थी, मुझे नहीं पता कि पीडब्ल्यूडी ने इसे नोट किया था या नहीं। इस पुल के रख-रखाव की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी और रेलवे प्रशासन की थी।

यह पुल अगर एक घंटे की देरी से टूटता तो और हादसा बहुत बड़ा हो सकता था। दरअसल एक घंटे बाद पुल पर ऑफिस से लौटने वाले लोगों की भीड़ होने की वजह से पुल पर लंबा ट्रैफिक रहता है। यह पुल कोलकाता के बाकी हिस्सों, बेहला और दक्षिण परगना जिले को जोड़ता है। व्यस्त घंटों में इस पुल से करीब 4 हजार गाड़ियां गुजरती हैं। बेहला में अकेले करीब 10 लाख की जनसंख्या है।

ममता बनर्जी ने कहा – राहत प्रदान करना प्राथमिकता