आज दूसरे चरण का मतदान: महाराष्ट्र की इन चार सीटें पर टिकी हैं सबकी निगाहें


लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिए आज गुरुवार 18 अप्रैल को महाराष्ट्र में 10 सीटों पर चुनाव होने हैं।
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मुंबई। लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिए आज गुरुवार 18 अप्रैल को महाराष्ट्र में 10 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनमें चार सीट हाई प्रोफाइल हैं जिन पर पूरे देश की निगाहें लगी होंगी। ये चार सीटें हैं अकोला, नांदेड, बीड और सोलापुर। ये सीटें खास इसलिए हैं क्योंकि यहां कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। प्रकाश आंबेडकर ( अकोला), अशोक चव्हाण (नांदेड़), डॉ। प्रीतम गोपीनाथ मुंडे (बीड), सुशील कुमार शिंदे (सोलापुर) इन सीटों पर चुनाव मैदान में हैं। इन चार सीटों के अलावा बुलढाना, अमरावती, हिंगोली, परभणी, उस्मानाबाद और लातूर सीट पर भी चुनाव है।

अकोला: यहां से डॉ. भीमराव आंबेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर चुनाव मैदान में हैं। उनकी टक्कर बीजेपी के संजय धोत्रे से है जो पिछले तीन बार से यहां के लोकसभा सांसद हैं। प्रकाश आंबेडकर यहां से तीसरी बार मैदान मे हैं। यहां से कांग्रेस के भी उम्मीदवार मैदान में है लेकिन कहा जा रहा है कि मुख्य मुकाबला प्रकाश और संजय धोत्रे के बीच ही है। इस लोकसभा क्षेत्र में अकोट, बालापुर, अकोला वेस्‍ट, अकोला ईस्‍ट, मुर्तिजापुर और रिसोड़ हैं। आजादी के बाद पहले चुनावों से लेकर 90 के दशक के आखिरी तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है। 1989 में पहली बार बीजेपी ने यह सीट जीती थी। उसके बाद कांग्रेस आज तक यहां दोबारा कब्जा नहीं जमा पाई है। बीजेपी के पांडुरंग फुंडकर ने यहां से कांग्रेस का पत्ता साफ किया था। बाद में प्रकाश आंबेडकर ने 1998 और 1999 में यहां से जीत हासिल की। उसके बाद 2004 से लगातार संजय धोत्रे यहां से जीतते आ रहे हैं। अब यह देखना मजेदार होगा कि संविधान निर्माता डॉ। भीमराव आंबेडकर के पौत्र अपनी सीट हासिल कर पाते हैं या ये एक बार यहां भगवा झंडा लहराएगा।

नांदेड़: नांदेड़ सीट को कांग्रेस के गढ़ के रूप में पहचाना जाता है। इस सीट से राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण कांग्रेस की तरफ से चुनावी मैदान में हैं। बीते लोकसभा चुनाव के दौरान जब कांग्रेस पूरे देश में 48 सीटों पर सिमट कर रह गई थी तब भी यहां अशोक चव्हाण जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। इस सीट को चव्हाण परिवार की पारंपरिक सीट कहा जाता है। यहां से अशोक चव्हाण के पिता शंकर राव चव्हाण भी सांसद रह चुके हैं। अशोक चव्हाण के सामने बीजेपी के लातूर से विधायक प्रताप चिखलीकर हैं। प्रताप पहले कांग्रेस में भी रह चुके हैं। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अशोक चव्हाण से विवाद के कारण ही कांग्रेस छोड़ी थी। साल 2004 में बीजेपी के दिगंबर बापूजी पाटिल इस सीट से चुनाव जीते थे। इस सीट पर वंचित अघाड़ी के टिकट पर धनगर समुदाय के यशपाल भींगे भी मैदान में हैं। लेकिन माना जा रहा है कि मुख्य मुकालबला बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच ही है।

बीड: बीजेपी के दिग्गज नेता रहे दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे की सीट होने के कारण इस पर सबकी निगाहें रहेंगी। उनके खिलाफ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की तरफ से बजरंग मनोहर सोनवणे उम्मीदवार हैं। इस सीट पर मुख्य मुकाबला बीजेपी-शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बीच है। हालांकि यहां निर्दल प्रत्याशियों समेत कुल 36 उम्मीदवार मैदान में हैं। समाजवादी पार्टी के सैयद मुजम्मिल सैयद जमील और बहुजन आघाडी पार्टी के विष्णु जाधव भी मैदान में हैं। गोपीनाथ मुंडे की एक और बेटी पंकजा मुंडे महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं। मुंडे परिवार की इस इलाके में अच्छी पकड़ है। इस सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें गेवराई, मजलगांव, बीड, अष्‍टी, केज और पर्ली हैं। इस सीट पर 19,57,132 मतदाता हैं जिनमें से 10,39,789 पुरुष हैं और 9,17,343 महिलाएं हैं।

सोलापुर: इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबले के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। कांग्रेस की तरफ दिग्गज नेता सुशील कुमार शिंदे मैदान में हैं। बीजेपी ने लिंगायत समुदाय के धार्मिक गुरु जय सिद्धेश्वर शिवआचार्य को मैदान में उतारा है। प्रकाश आंबेडकर के भी इस सीट से लड़ाई में आ जाने से लड़ाई मजेदार हो चली है। कांग्रेसी नेता सुशील कुमार शिंदे यहां तीन बार सांसद रहे हैं। लेकिन 2014 में मोदी लहर में यह सीट उनसे बीजेपी शरद बनसोडे ने छीन ली थी। सुशील शिंदे को करीब डेढ़ लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इस बार भी शिंदे के लिए ये सीट आसान नहीं है। इस बार उनके सामने बीजेपी से धार्मिक गुरु खड़े हैं तो प्रकाश आंबेडकर भी हैं। ये लड़ाई शिंदे की साख का सवाल बन चुकी है। यहां पर लगभग 2।5 लाख लिंगायत वोटर हैं और मुस्लिम मतदाताओं की संख्या दो लाख है।

इन चार सीटों के अलावा छह अन्य सीटों पर भी गुरुवार को मतदान होगा। ये सीटें हैं- बुलढाना, अमरावती, हिंगोली, परभणी, उस्मानाबाद और लातूर।

– ईएमएस