अब आसानी से होंगे केदारनाथ के दर्शन, टोकन ले कर सीधे कपाट तक पहुंचेंगे श्रद्धालु


हिमालय में बसे भगवान केदारनाथ के दर्शनों के लिए इस बार भक्तों को सर्दी और बारिश में लंबी-लंबी लाइन में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा।
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नई दिल्ली । हिमालय में बसे भगवान केदारनाथ के दर्शनों के लिए इस बार भक्तों को सर्दी और बारिश में लंबी-लंबी लाइन में खड़ा नहीं रहना पड़ेगा। यात्रियों को दर्शन के लिए टोकन दिए जाएंगे और बारी आने पर ही उन्हें मंदिर परिसर में थोड़ी देर इंतजार करना पड़ेगा। उत्तराखंड के गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलने से शुरू होते ही चार धाम यात्रा का शुरुआत होगी। 7 मई को इस बार यात्रा का शुभारम्भ गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलने से होने जा रहा हैं। केदारनाथ धाम के कपाट 9 मई को और बद्रीनाथ धाम के दर्शन 10 मई से हो सकेंगे। रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी तट पर 3584 मीटर की ऊंचाई पर बसा केदारनाथ मंदिर भगवान शिव का बारहवां ज्योतिर्लिंग है। गंगोत्री धाम को मां गंगा का, तो यमनोत्री को यमुना नदी का मायका कहा जाता है। अलकनंदा नदी किनारे बसे बद्रीनाथ धाम को मोक्ष का धाम कहा जाता है। यहां भगवान श्री विष्णु योग मुद्रा में विराजमान हैं। सबसे ज्यादा तीर्थयात्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा के लिए आते हैं, लेकिन इन धामों में सबसे दुर्गम यात्रा केदारनाथ धाम की मानी जाती है।

इस बार सर्दियों में हुई भारी बर्फबारी ने यात्रा की तैयारियों को कई बार बाधित किया है। बर्फ के कारण खासतौर से केदारनाथ धाम में काफी नुकसान हुआ। इस कारण यहां रुकने के इंतजाम पर भी असर पड़ा है। इसलिए इस बार केदारनाथ धाम में एक समय में अधिकतम एक हजार श्रद्धालु ही रुक सकेंगे। धाम के पास ही बने एक पड़ाव पर पांच सौ यात्री ही रूक पाएंगे, जबकि गौरीकुंड में आठ हजार भक्तों इंतजाम होगा। केदारनाथ की यात्रा पर आने वाले भक्तों की निजी गाड़ियों को भी इस बार गौरीकुंड तक नहीं आने दिया जाएगा। इन वाहनों को 6 किलोमीटर पहले सोनप्रयाग में ही रोक दिया जाएगा। हर साल लगभग 25 लाख भक्त यहां चारधामों में दर्शनों के लिए आते हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस बार भी फोटोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन के लिए 36 केंद्र बनाए गए हैं। यात्रा की शुरुआत ऋषिकेश से होती है। इसलिए सबसे प्रमुख केंद्र यहां पर बनाया गया है। इसके अलावा हरिद्वार, दोबाटा, बड़कोट, फाटा, सोनप्रयाग, जोशीमठ, पांडुकेश्वर सहित कई अन्य स्थानों पर भी यात्री रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर प्रशासन को सटीक जानकारी मिल सकती है। मौसम खराब होने पर या कोई अन्य जानकारी पहुंचाने के लिए रजिस्टर किए गए नंबरों पर सूचनाएं भेजी जा सकती हैं।

– ईएमएस