सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र में मांस-मदिरा की दुकान के विरोध में एकजुट हो जैन समाज


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रतलाम । आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखरजी में पर्यटन के नाम पर शराब और मीट की दुकान खोलने की झारखंड सरकार की घोषणा पर नाराजगी व्यक्त की है।

मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कहा कि पर्यटन के नाम पर यदि तीर्थ क्षेत्र की अस्मिता और आस्था पर कोई प्रहार किया जाएगा तो इसे जैन समाज स्वीकार नहीं करेगी। इसका पुरजोर विरोध होगा। इसके लिए चाहे जो भी कुर्बानी देना पड़े समाज को इसके लिए तैयार होना होगा।

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प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा की होली सिटी के नाम पर मुगलों और अंग्रेजों के राज में भी सम्मेद शिखर की पवित्रता बनी रही। उन्होंने वर्तमान झारखंड सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह अपने आप को धर्म को मानने वाली सरकार कहती है।किंतु यह इतना बड़ा अधर्म करेगी, यह विश्वास नहीं होता है। प्रमाण सागर जी ने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री धर्म पर विश्वास करते हैं। वह बेहतर शासक हैं।

मुनि श्री ने जैन समाज के चारों संप्रदाय के लोगों को मुख्यमंत्री से मिलकर समाज की बात रखनी चाहिए।मुनि श्री ने कहा की पवित्र क्षेत्र में यदि कोई सरकार मीट- शराब की दुकान खोलती है,तो उसका सर्वनाश निश्चित है।मुनि श्री ने समाज के लोगों से आव्हान किया कि जिस तरह सल्लेखना के मामले में सारा जैन समाज एकजुट हुआ था। तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखरजी की अस्मिता को बचाने के लिए भी सारा समाज एकजुट होकर झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के सामने पुरजोर विरोध करें।उन्होंने देशभर के जैन समाज के सभी श्रद्धालुओं से कहा कि वह अपना विरोध पत्र झारखंड और केंद्र सरकार को भेजें। जरूरत पड़ने पर जैन समाज को आंदोलन के लिए तैयार रहना चाहिए।