जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ नहीं रहे


जगदगुरू शंकराचार्य भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी श्री दिव्यानंद तीर्थ का आज सुबह दिल्ली के एम्स हास्पिटल में निधन हो गया।
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आज बिजासन रोड़ स्थित अखंडधाम आश्रम पर श्रद्धांजलि सभा

दिल्ली/इन्दौर। जगदगुरू शंकराचार्य भानपुरा पीठाधीश्वर स्वामी श्री दिव्यानंद तीर्थ का आज सुबह दिल्ली के एम्स हास्पिटल में निधन हो गया। शहर से उनके 25-30 वर्षों से आत्मीय रिश्ते रहे। रविवार को सुबह 11 बजे बिजासन रोड़ स्थित अखंडधाम आश्रम पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन रखा गया है।

बिजासन रोड स्थित अखंड धाम आश्रम के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी चेतनस्वरूप एवं संयोजक हरि अग्रवाल ने बताया कि यह दुखद समाचार मिलते ही शहर में उनके सैकड़ों भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। पिछले दिनों दिसंबर के अंतिम सप्ताह में अखंडधाम आश्रम पर आयोजित 51 वें अ.भा. अखंड वेदांत संत सम्मेलन में उनका सानिध्य मिला था और उन्होने वादा भी किया था कि अगले वर्ष भी जरूर आऊंगा लेकिन आज उनके निधन की खबर आ गई। अखंड धाम आश्रम एवं शहर के अनेक संगठनों से उनका पिछले 25-30 वर्षों से आत्मीय रिश्ता बना रहा। उनकी विद्वता एवं सरलता-सहजता का ही प्रभाव था कि जो भी एक बार उनसे मिल लेता, उनका ही हो कर रह जाता था। उनके असमय चले जाने से शहर के भक्तों के साथ संत समाज को भी गहरा आघात पहुंचा हैं। पूर्व पार्षद देवकृष्ण सांखला, योगेंद्र महंत, पार्षद दीपक जैन टीनू, ठा. विजयसिंह परिहार, सचिन सांखला, दीपक चाचर, संजय सोनी, कमलेश मिश्रा आदि ने उनके निधन पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि समर्पित की है। देश में पहली बार देवी भागवत का आयोजन अखंडधाम आश्रम पर श्राद्ध पक्ष में स्वयं शंकराचार्यजी के सानिध्य में ही हुआ था। अखंडधाम आश्रम पर रविवार 21 अप्रैल को सुबह 11 बजे विभिन्न संगठनों की ओर से श्रद्धांजलि सभा रखी गई है।

:: जीवन परिचय ::

उत्तरप्रदेश के बुलंद शहर जिले के ग्राम बैरा फिरोजपुर में एक उच्च शिक्षित ब्राहम्ण परिवार में 4 जनवरी 1953 को जन्में स्वामी दिव्यानंद तीर्थ ने अंग्रेजी में एम.ए. करने के बाद कुछ दिन अध्यापन और पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया। 1980 में वे गृह त्याग कर निर्जन वन में स्थित स्वयंभू श्यामेश्वर महादेव की साधना-आराधना में जुट गए। जुलाई 1984 में आपने चित्रकूट में सन्यास दीक्षा प्राप्त की। उन्होने जापान के क्यूरों विश्वविद्यालय में एशिया के धर्म सम्मेलन का उद्घाटन एवं जापान में पहले शिव मंदिर का शिलान्यास भी किया। अमेरिका, ब्रिटेन एवं वेस्टइंडीज में भारतीय दर्शन, धर्म एवं संस्कृति से जुड़े सम्मेलनों में भाग लिया और न्यूयार्क में संपन्न संयुक्त राष्ट्रसंघ के विश्वशांति शिखर सम्मेलन को भी संबोधित किया।

:: भानपुरा है अवांतर पीठ ::

आद्य जगदगुरू शंकाराचार्य ने देश में चार मठ स्थापित किए हैं। इनमें ज्योर्तिमठ, गोवर्धन मठ, श्रृंगेरी मठ और द्वारका मठ में से एक ज्योर्तिमठ को 250 वर्ष पूर्व तत्कालीन शंकराचार्य स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरी ने अपरिहार्य कारणों से अपना मुख्य कार्यालय म.प्र. के भानपुरा में स्थानांतरित कर लिया था। वर्ष 1940 में मदन मोहन मालवीय, भारत धर्म मंडल, सनातन धर्म एवं साधु मंडल के प्रयासों से ज्योर्तिमठ को पुनः जागृत कर स्वामी ब्रम्हानंद सरस्वती को ज्योतिष पीठाधीश्वर पद पर विराजीत किया गया, तब भानपुरा में स्वामी सदानंद गिरी शंकराचार्य थे। कालांतर में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी, जो अब महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी के गुरू हैं, भी भानपुरा पीठ के शंकराचार्य रहे। उनके पद छोड़ने पर 6 फरवरी 1989 को प्रयाग कुंभ में भानपुरा पीठाधीश्वर के पद पर स्वामी दिव्यानंद तीर्थ का अभिषेक किया गया तब से ही वे देश-विदेश में भारतीय धर्म संस्कृति की पताका फहराते आ रहे थे।

– ईएमएस