2022 तक इसरो भी स्पेस में भेज सकेगा इंसान : डा. सिवन


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के प्रमुख डा. के. सिवन ने कहा कि 2022 तक यह संस्थान मनुष्य को स्पेस में भेजने में सफल होगा।
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गोरखपुर। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख डा. के. सिवन ने कहा कि 2022 तक यह संस्थान मनुष्य को स्पेस में भेजने में सफल होगा। इसरो ने अंतरिक्ष में भारतीय मानव मिशन की श्रृंखला में एक कदम बढ़ाते हुए एक ऐसा कैप्सूल विकसित किया है जो किसी भी दुघर्टना से अंतरिक्ष में मनुष्य की रक्षा करेगा।

श्रीहरिकोटा में इसरो ने जीवनरक्षक कैप्सूल का सफल परीक्षण भी किया है। जाने-माने वैज्ञानिक डा. सिवन गोरखपुर विविद्यालय के 37वें दीक्षान्त समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने पहुंचे हैं। एक स्थानीय होटल में पत्रकारों से बातचीत में इसरो अध्यक्ष ने कहा कि मनुष्य को स्पेस में भेजने की प्रौद्योगिकी विकसित की जा चुकी है।मानव क्रू मॉड्यूल और पर्यावरण नियंत्रण जैसी प्रौद्योगिकी भी डेवलप की जा चुकी है। उन्होंने दावा किया कि 2022 तक मनुष्य को स्वदेशी गगनयान से स्पेस में सफलतापूर्वक भेजने में इसरो सफल होगा।

डा. सिवन 1982 से इसरो में आए और पीएसएलवी परियोजना पर उन्होंने काम किया। उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। जिसमें चेन्नई की सत्यभामा यूनिवर्सिटी से अप्रैल 2014 में उन्हें डॉक्टर ऑफ साइंस और वर्ष 1999 में श्री हरी ओम आश्रम प्रेरित डॉ. विक्रम साराभाई रिसर्च अवॉर्ड भी शामिल है। कई जर्नल में सिवान के पेपर भी प्रकाशित हुए हैं। वह 104 सेटेलाइट को एक साथ अंतरिक्ष में भेजने में इसरो की मदद कर चुके हैं। एक सवाल के जवाब में डॉ. सिवन ने कहा कि नवंबर में वायुसेना के लिए उपयोगी जीएसएटी-7ए तथा जीएसएटी 11 की भी लांचिंग होगी।

इसके बाद दिसंबर में भी इसी तरह से पीएसएलवी सी-44 लांच करेंगे। चंद्रमा पर चंद्रयान-2 की एक्टिविटी की जानकारी के लिए हमारे भारत के वैज्ञानिक वहां परीक्षण करेंगे। उन्होंने रिसर्च सेन्टर तथा इक्यूवेशन सेन्टर्स के बारे में भी जानकारी देते हुए बताया कि शीघ्र ही वे छह रिसर्च सेन्टर बनाएंगे। जिसमें अगरतला, खड़गपुर, भुवनेश्वर, बनारस इत्यादि होंगे।

उन्होंने कहा कि वे चंद्रमा पर कृषि के क्षेत्र में भी प्लान कर चुके हैं। जिसमें उत्तम तकनीकों द्वारा वहां विभिन्न अनाजों की खेती भी की जाएगी। जिसके लिए विभिन्न एप्लिकेशंस तैयार किये जा रहे हैं। डॉ. सिवन ने बताया कि भारत में बहुत से प्रतिभाशाली छात्र हैं जो जिनकी प्रतिभा का उपयोग किया जायेगा। उन्होंने कहा कि चांद पर पहुंचना मिशन की प्लानिंग है। अगले छह महीने में 15 सेटेलाइट मिशन को वे अंजाम देंगे।

– ईएमएस