पंजाब को दहलाने की तैयारी में आईएसआई, ‘खालिस्तान गदर फोर्स बना रहा


संदिग्ध आतंकी से हुई पूछताछ में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के इशारे पंजाब में 'खालिस्तान गदर फोर्स' बनाने की साजिश कर रहा है।
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नई दिल्ली । पिछले महीने पटियाला से गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी शबनमदीप सिंह की पुलिस से हुई पूछताछ में खुलासा हुआ था कि वो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के इशारे पर वहां पंजाब में नए आतंकी ग्रुप ‘खालिस्तान गदर फोर्स’ बनाने की साजिश कर रहा है। इसमें विदेशों में रह रहे खालिस्तान समर्थक की भी मदद मिल रही है। सूत्रों के मुताबिक इस सिलसिले में वो कई बार आईएसआई के एक एजेंट जावेद खान वज़ीर के साथ साथ पाकिस्तानी खालिस्तानी समर्थक गोपाल सिंह चावला से लगातार वो संपर्क में था।

पंजाब पुलिस ने जब शबनमदीप सिंह को गिरफ्तार किया, उसके पास से ‘खालिस्तान गदर फोर्स’ से संबधित कई लेटर पैड भी मिले थे। पंजाब पुलिस ने शबनमदीप सिंह की गिरफ्तारी को एक बड़ी कामयाबी बताया था। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक आईएसआई पाकिस्तान, ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों में रह रहे खालिस्तानी समर्थकों के द्वारा पंजाब के युवाओं को बहला फुसला कर खालिस्तानी टेरर नेटवर्क से जोड़ने की साजिश में लगी हुई है।

केन्द्रीय सुरक्षा से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक आईएसआई ने पंजाब में नए-नए टेरर ग्रुप बनाने की कोशिश में लगी है। खालिस्तानी आतंकियों से जुड़े सभी ग्रुप पर खुफिया एजेंसियों की लगातार नज़र रहती है। इसकारण नए बने टेरर ग्रुप कई बार एजेंसियों की नज़र में जल्दी नहीं आते जिसका फायदा आईएसआई को मिलता है।

खुफिया एजेंसियों को शक है कि पंजाब में छोटे मोटे अपराधों में शामिल युवाओं को आईएसआई इन टेरेर ग्रुप में जो़ड़ने में लगी हुई है। यहीं नहीं विदेशों में रह रहे कुछ खालिस्तानी समर्थक पंजाब को भारत से अलग करने की साजिश के तहत रिफ्रेंडम 2020 के नाम से एजेंड़ा चला रहे हैं। खुफिया एजेंसियों को शक है कि पाकिस्तान पंजाब में गड़बड़ी फैलाने के लिए हथियारों के साथ साथ पैसों से काफी मदद कर रहा है।
शबनम ने बताया कि नए टेरेर ग्रुप के लिए आईएसआई ने दस लाख रूपये देने का वादा किया था,हालांकि समय रहते आईएसआई की ये साजिश बेनकाब हो गई। गृह मंत्रालय ने सभी एजेंसियों से कहा है कि वो ‘खालिस्तान गदर फोर्स’ से संबधित सभी जानकारियों को इकट्ठा करे और ये भी पता लगाया कि इस ग्रुप से अबतक कितने लोग जुड़े हो सकते हैं और इनके पीछे कौन है। सुरक्षा से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक खालिस्तानी आतंकियों से जुड़े युवाओं को उन्हें अपने मोबाईल में खास तरीके के मैसेजिंग एपिलीकेशन से जुड़ने को कहा जाता है, इन मैसेजिंग एपिलीकेशन की सबसे खास बात ये होती है कि इनसे किए गए चैटिंग जल्द जांच एजेंसियों की नजर में नहीं आते। उन्हें हथियारों की खेप कहां से मिलेगी।

– ईएमएस