खुदरा महंगाई छह महीने के शीर्ष पर, बढ़ेगी महंगाई


उपभोक्ता आधारित महंगाई दर (सीपीआई) अप्रैल में बढक़र छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।
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नई दिल्ली। उपभोक्ता आधारित महंगाई दर (सीपीआई) अप्रैल में बढक़र छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान खुदरा महंगाई में मामूली इजाफा हुआ है, लेकिन यह छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। सीएसओ ने बताया कि अप्रैल में सीपीआई 2.92 फीसदी रहा, जो मार्च के 2.86 फीसदी के मुकाबले 0.06 फीसदी ज्यादा है। हालांकि, यह आरबीआई के अनुमानित आंकड़ों से नीचे रही है, जिससे अगली एमपीसी बैठक में रेपो रेट की कटौती की उम्मीदें बरकरार हैं। पिछले साल की समान अवधि में खुदरा महंगाई की दर 4.58 फीसदी रही थी। सीएसओ के अनुसार, अप्रैल में कीमतें बढऩे की दर अक्तूबर, 2018 के बाद सबसे ज्यादा रही है। महंगाई के आंकड़ों पर आरबीएल बैंक के अर्थशास्त्री रजनी ठाकुर ने कहा कि धीरे-धीरे मुद्रास्फीति की दर आरबीआई के अनुमानित लक्ष्य के करीब पहुंच रही है, जो 4 फीसदी है। वहीं, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि 2019-20 में भारत की खुदरा महंगाई दर 60 आधार अंक बढक़र 4 फीसदी पहुंच सकती है। पिछले वित्त वर्ष यह 3.4 फीसदी रही थी।

खाने-पीने की चीजें तीन गुना महंगी

अप्रैल में खाद्य पदार्थों में महंगाई की दर तीन गुना बढ़ी और यह मार्च के 0.3 फीसदी से उछलकर 1.1 फीसदी पर आ गई। सब्जियों की महंगाई दर भी 2.87 फीसदी बढ़ी, जबकि फलों की महंगाई दर में गिरावट रही। ईंधन और बिजली की महंगाई दर भी 2.56 फीसदी पहुंच गई, जो मार्च में 2.42 फीसदी थी। ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई दर मार्च के 1.8 फीसदी से बढक़र 1.87 फीसदी, जबकि शहरी क्षेत्र की 4.1 फीसदी से बढक़र 4.23 फीसदी हो गई है।

– ईएमएस