राम के जन्‍मस्‍थान में परिवर्तन संभव नहीं: स्वरूपानंद सरस्वती


परम धर्माधीश शंकराचार्य स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती ने कहा कि राम के जन्‍म स्‍थान में परिवर्तन संभव नहीं है और मंदिर बनना भी तय है।
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उप्र सरकार और विश्‍व हिंदू परिषद पर भी हमला बोला

वाराणसी । परम धर्माधीश शंकराचार्य स्‍वामी स्‍वरूपानंद सरस्‍वती ने कहा कि मुस्लिमों को स्‍वयं राम जन्‍मभूमि हिंदुओं को सौंप कर मंदिर बनाने में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राम के जन्‍म स्‍थान में परिवर्तन संभव नहीं है और मंदिर बनना भी तय है। धर्म संसद में तीसरे दिन शाम तक चली चर्चा के बाद शंकराचार्य ने धर्म संसद को संबोधित करते हुए यूपी सरकार और विश्‍व हिंदू परिषद पर हमला बोला।

उन्होंने कहा, ‘अयोध्‍या की धर्म सभा में जुटने वाले, श्रीराम को मनुष्‍य मानने वाले और राम का पुतला बनाने में रुचि रखते हैं न कि रामलला का मंदिर बनाने में। राम को मनुष्‍य मानना परमात्‍मा का अपमान है।’ शंकराचार्य ने यह भी कहा, ‘कुछ लोग अब अयोध्‍या में अश्‍वमेध यज्ञ की तैयारी में हैं। क्‍या वह तांबे का घोड़ा लाएंगे? कोई दस बच्‍चे पैदा करने की नसीहत दे रहा तो कोई नए-नए छद्म भगवान ही बना दे रहा है। सरकार की शह पर मं‍दिरों में साईं की मूर्ति स्‍थापित की जा रही है। यह शास्‍त्र सम्‍मत है कि जब भी अपूज्‍यों की पूजा होगी, नुकसान जनता का होगा। मंदिर आद राम का नहीं बल्कि आराध्‍य देव राम का होगा। हमारा संघर्ष भी इसी को लेकर है।’ धर्म संसद में तीन दिनों में राम मंदिर निर्माण से लेकर मंदिरों की रक्षा, धर्मांतरण, वैदिक शिक्षा, गंगा रक्षा, गोवंश संरक्षण और धर्म रक्षा विषयों पर प्रस्‍ताव आए। इन प्रस्‍तावों को अवर सदन ने प्रवर सदन को सौंप दिया। प्रवर सदन ने भी विर्मश के बाद अपना सामूहिक अभिमत परम धर्माधीश शंकराचार्य को सौंप दिया है। धर्म संसद के प्रवर धर्माधीश स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद ने अगली धर्म संसद के स्‍थान व तिथि की घोषणा की। उन्होंने बताया कि कुंभ के मौके पर प्रयागराज में 29 से 31 जनवरी तक धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा। हिंदू महासभा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष स्‍वामी चक्रपाणि महाराज ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘न राम मंदिर बना और न ही गोरक्षा के लिए कानून बना। सरकार ने गोरक्षा करने का वादा कर के गे-रक्षा कानून बना दिया। सरकार जनता और संतों को आखिर कब तक बेवकूफ बनाएगी? जो राम का नहीं वह किसी काम का नहीं। सरकार अध्‍यादेश लाकर मंदिर निर्माण शुरू करवाए।’

– ईएमएस