सेकेंड क्लास तक के छात्रों को नहीं मिलेगा होमवर्क, सरकार ने घटाया बस्ते का बोझ


देशभर के स्कूली बच्चों के लिए अच्छी खबर है। अब पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को स्कूल से होमवर्क नहीं दिया जाएगा।
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नई दिल्ली। देशभर के स्कूली बच्चों के लिए अच्छी खबर है। अब पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को स्कूल से होमवर्क नहीं दिया जाएगा। सरकार की ओर से २० नवंबर को जारी सर्कुलर के मुताबिक, पहली से लेकर १०वी क्लास तक के बच्चों के बस्ते का बोझ भी सीमित कर दिया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को सर्कुलर जारी किया है। इसमें सभी को इन आदेशों की पालना करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा किताबें लाने के लिए भी बच्चों को बाध्य नहीं किया जाएगा। पहली और दूसरी क्लास के छात्रों को अब होम वर्क नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा उनके स्कूली बस्ते का बोझ अधिकतम डेढ़ किलो होगा इस तरह उनके बस्ते को बोझ भी कम के दिया है। तीसरी से पांचवीं तक के कक्षाओं के छात्रों के लिए दो से तीन किलो, छठी से सातवीं तक के लिए ४ किलो ८वीं से नवीं तक के किए साधे ४ किलो और १०वीं क्लास के छात्रों के लिए पांच किलोग्राम वजन तक स्कूली बस्ते लाने की अनुमति दी है। साथ ही स्कूल उन्हें अतिरिक्त बुक्स और अन्य सामग्री लाने का निर्देश भी नहीं दी सकते हैं।

मंत्रालय ने पहली और दूसरी क्लास के छात्रों को केवल गणित और भाषा पढ़ाने की अनुमति दी है, जबकि तीसरी से ५वीं कक्षा के छात्रों को गणित भाषा और सामान्य विज्ञान को ही पढ़ाने का निर्देश दिया है। जो राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) द्वारा मान्यता दी गई है। मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वह इस दिशा में गाइडलाइन तैयार करें और इसे तत्काल प्रभाव से लागू करें। कक्षा पहली व दूसरी के बच्चे को कोई भी होमवर्क नहीं दिया जाएगा। इसके साथ-साथ कक्षा पहली से दूसरी तक भाषा, गणित विषय से संबंधित केवल दो ही किताबें अनिवार्य हैं, जबकि कक्षा तीसरी से पांचवीं तक भाषा, ईवीएस, गणित विषय की केवल एनसीईआरटी पाठयक्रम की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं। गौरतलब है कि निजी स्कूलों में एनसीईआरटी पाठयक्रम की पुस्तकें लागू किए जाने संबंधी एक मामले की सुनवाई ६ दिसंबर को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में होनी है। कई सालों से स्कूली बस्ते का वजन कम करने की मांग की जा रही थी क्योंकि स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकें चलाने के लिए स्कूली बस्ते को भारी कर रहे थे और होमवर्क से छोटे बच्चे और उनके अभिभावक भी परेशान थे।

– ईएमएस