हाईकोर्ट का सख्त रवैया, दिल्ली में 1984 के दंगे जैसे हालात नहीं बनने देगें


(PC : Twitter/@NH_India)

बीजेपी नेता अनुराग, कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करें

नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली में हुए उपद्रव पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाकर दिल्ली पुलिस को भड़काऊ भाषण देने के आरोप में बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और परवेश वर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को कहा है।

बता दें कि अनुराग ठाकुर केंद्रीय मंत्री हैं, परवेश वर्मा पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी सांसद हैं। वहीं कपिल मिश्रा इस बार बीजेपी के टिकट पर विधायकी का चुनाव लड़े थे, हालांकि वे हार गए थे। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी कर कहा है कि इन नेताओं के खिलाफ पहले क्यों नहीं कार्रवाई की गई। कोर्ट ने कहा कि इस बार वे दिल्ली में 1984 के दंगे जैसे हालात नहीं बनने देने वाले है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे पुलिस आयुक्त को बीजेपी के तीन नेताओं द्वारा सीएए हिंसा के सिलसिले में कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण देने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने की सलाह दें।

न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की पीठ सीएए कानून को लेकर उत्तरपूर्वी दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में शामिल लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने कहा कि बाहर के हालात बहुत ही खराब हैं। हाईकोर्ट ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता, पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) राजेश देव से पूछा कि क्या उन्होंने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा के कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण का वीडियो क्लिप देखा है। मेहता ने कहा, वह टेलीविजन नहीं देखते हैं और वे क्लिप उन्होंने नहीं देखीं हैं। देव ने कहा कि उन्होंने बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के वीडियो देखे हैं लेकिन मिश्रा का वीडियो नहीं देखा है। पुलिस अधिकारी के बयान पर न्यायमूर्ति मुरलीधर ने टिप्पणी की, ‘दिल्ली पुलिस की दशा पर मुझे वाकई में हैरानी है।

सुनवाई की शुरुआत में पुलिस आयुक्त का प्रतिनिधित्व करने के मुद्दे पर सॉलिसीटर जनरल मेहता और दिल्ली सरकार के अधिवक्ता राहुल मेहरा के बीच तीखी बहस हुई। मेहरा ने पुलिस आयुक्त की ओर से विधिक अधिकारी के पेश होने पर आपत्ति जताई। मेहरा ने कहा कि केंद्र तथा दिल्ली सरकार की शक्तियों के मुद्दे का निपटारा उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ कर चुकी है और हर किसी को देश के कानून का पालन करना चाहिए। मेहता ने कहा कि मामले में भारत संघ भी एक पक्षकार है और उन्हें पेश होने का निर्देश उपराज्यपाल ने दिया है। मेहता ने कहा,यहां अशोभनीय माहौल मत बनाएं, मैं किसी रैली को संबोधित नहीं कर रहा। मैं मुवक्किल की ओर से पेश हुआ हूं।’इसके बाद उन्हें मामले में दलीलें रखने की अनुमति दी गई। सॉलिसीटर जनरल ने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करने वाली याचिका में केन्द्र को भी पक्षकार बनाने का अनुरोध किया और कहा कि यह मुद्दा कानून-व्यवस्था से जुड़ा है मेहता ने हाईकोर्ट से मामले पर सुनवाई बृहस्पतिवार को करने का अनुरोध करते हुए कहा कि याचिका में जो आग्रह किया गया है उस पर कल सुनवाई की जा सकती है।