जीएसटी : आपदा की स्थिति में सेस लगाने के लिए जीओएम का गठन


नई दिल्ली। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) परिषद ने आपदा की स्थिति में सेस लगाने के लिए शुक्रवार को सात सदस्यीय मंत्री समूह (जीओएम) के गठन का फैसला किया।

केरल ने जीएसटी के साथ अतिरिक्त सेस लगाने की मांग की थी, ताकि प्राकृतिक आपदा के समय वित्तीय जरूरतों को पूरा कर सकें।

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने यहां परिषद की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के अलावा इस समिति में पूर्वोत्तर, पहाड़ी और तटीय राज्यों के मंत्री भी होंगे, जहां प्राकृतिक आपदा आने की अधिक संभावना होती है।

जेटली ने कहा कि परिषद के सदस्यों के बीच इसे लेकर अलग-अलग राय थी, लेकिन सभी राज्य इस बात पर सहमत थे कि केरल में आई बाढ़ जैसी आपदा या भविष्य में आनेवाली इसी तरह की आपदाओं की स्थिति में सेस लगाने के लिए एक तंत्र होना चाहिए।

जेटली ने कहा, “परिषद में एक विचार यह था कि ‘जिस राज्य में प्राकृतिक आपदा आए, केवल उसी राज्य पर बोझ डाला जाए’, लेकिन दूसरी तरफ यह विचार भी था कि ऐसा करना एक देश- एक कर के मूल्यों के खिलाफ होगा।”

जेटली ने यह भी कहा कि जीओएम यह भी देखेगा कि एसडीआरएफ (राज्य आपदा राहत फंड) और एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा राहत फंड) का तंत्र पर्याप्त है या कुछ और करने की जरूरत है।

(Photo: IANS)

जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) संग्रह के आंकड़ों से संतुष्ट नजर आ रही सरकार ने कहा कि राज्य अपने राजस्व लक्ष्य को खुद से पूरा करने के रास्ते पर हैं, इसलिए उन्हें इसके लागू होने के पांच साल बाद केंद्र सरकार से मुआवजा मांगने की जरूरत नहीं होगी।

जीएसटी परिषद की यहां हुई बैठक के बाद वित्तमंत्री जेटली ने कहा कि हरेक राज्य के आंकड़ों से यह दिख रहा है कि पिछले साल की तुलना में (अगस्त तक) जीएसटी संग्रह बेहतर हुआ है।

उन्होंने कहा कि इस साल अगस्त जीएसटी के तहत राजस्व संग्रह के राज्यों के लक्ष्य में 13 फीसदी कमी दिख रही है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 16 फीसदी था। उच्च उपभोग के आंकड़ों को देखते हुए कहा जा सकता है कि लक्ष्य में कमी का आंकड़ा अभी एक-दो फीसदी और कम होगा।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हम पांच साल की अवधि (जीएसटी लागू करने की) से पहले ही राज्यों को होने वाले नुकसान को शून्य पर ले आएंगे. और राज्य अपने राजस्व लक्ष्य को प्राप्त करने के करीब होंगे।”

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने उन सवालों को टाल दिया जो पेट्रोल और डीजल के दाम में कमी करने के लिए कच्चे तेल के आयात पर कर कटौती पर विचार करने को लेकर पूछा गया था।

जेटली से पूछा गया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने के लिए क्या सरकार कच्चे तेल पर कर कटौती करने पर विचार कर रही है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले करीब एक महीने से रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रही हैं।

जेटली वस्तु एवं सेवा कर परिषद की बैठक के बाद मीडिया को बैठक की जानकारी दे रहे थे।

उनसे जब यह पूछा गया कि क्या बैठक में पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार किया गया तो उन्होंने कहा, “यह एजेंडा में नहीं था।”

कांग्रेस समेत राजनीतिक दल पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं ताकि उनपर लगने वाले करों में कमी हो, जिसके फलस्वरूप लोगों को पंप पर कम दर पर तेल मिलेगा।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि गैर-जरूरी वस्तुओं का आयात कम करने और निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश में पेट्रोल और डीजल की खपत करना भी चालू खाता घाटा कम करने के लिए की जा रही पूरी कवायद का हिस्सा है।

-आईएएनएस