पेट्रोल और डीजल के भाव सरकार के भरोसे?


मोदी सरकार में तेल का खेल कुछ इस तरीके से चल रहा है, इसको समझना बड़ा मुश्किल है।
Photo/Twitter
सरकार की सरपरस्ती में खरबों रुपए की कमाई कर रही है तेल कंपनियां

नई दिल्ली। मोदी सरकार में तेल का खेल कुछ इस तरीके से चल रहा है, इसको समझना बड़ा मुश्किल है। सरकार द्वारा कहा जाता है कि वैश्विक कीमतों के आधार पर तेल कंपनियां डीजल और पेट्रोल के रेट तय करती हैं किंतु पिछले कई माहों का रिकॉर्ड देखने से स्पष्ट है कि आयल कंपनियां मनमाने तरीके से रोजाना पेट्रोल और डीजल के रेट कम और ज्यादा करती हैं।

कच्चे तेल के दाम पिछले 5 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में काफी तेजी के साथ गिरे थे।किंतु इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिला। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 40 डालर से नीचे आ गई थी और पिछले माहोंं में 60 डालर प्रति बैरल और समय-समय पर कच्चे तेल की कीमतों में जो उतार-चढ़ाव था।उसके अनुसार तेल कंपनियों ने दाम कम नहीं किए। सरकार भी तेल कंपनियों द्वारा डीजल और पेट्रोल के जो रेट तय किए जाते है। उसकी कोई निगरानी व्यवस्था नहीं होने से तेल कंपनियों ने पिछले वर्षों में खरबों रुपए की कमाई करके उपभोक्ताओं को जमकर ठगा है।

तेल कंपनियां सरकार के इशारे पर पेट्रोल और डीजल के रेट कम और ज्यादा करती हैं। उसका वैश्विक बाजार से कोई लेना देना नहीं है। यह प्रमाणित भी हो रहा है।

9 जुलाई 2018 को कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 75.34 डालर था। तब पेट्रोल की कीमत 81.99 पैसे थी। डीजल की कीमत 71.68 पैसे थी। 12 जुलाई को कच्चा तेल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में 72 .48 डालर था। उस समय पेट्रोल की कीमत 79 रुपये 34 पैसे तथा डीजल की कीमत 72 रुपये 73 पैसे थी। 17 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70.53 डालर थी उस समय पेट्रोल के रेट 82.48 पैसे तथा डीजल के रेट 72.10 पैसे थे।

नवंबर माह में 5 विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 14 नवंबर को कच्चा तेल 64.64 डॉलर था तब पेट्रोल की कीमत 80.64 और डीजल की कीमत 73.64 रुपए थी।15 नवंबर को कच्चे तेल की कीमत 65.60 डालर था। भारत में पेट्रोल की कीमत 77.80 पैसे तथा डीजल की कीमत 74.39 पैसे थी। 19 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 65.88 डालर था तब भारत में पेट्रोल की कीमत 79.71 और डीजल की कीमत 72.82 पैसा थी।

विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर से नवंबर माह के बीच अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 22 फ़ीसदी गिरी थी। लेकिन तेल कंपनियों ने 10 फ़ीसदी पेट्रोल के दाम कम किए थे। डीजल की बात करें तो इनकी कीमतों में केवल 4.5 फ़ीसदी ही घटाई थी। जबकि वैश्विक बाजार में डीजल के रेट 11.5% कम हुए थे।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें उपरोक्तनुसार देखने से स्पष्ट है कि भारतीय तेल कंपनियां मनमाने ढंग से पेट्रोल एवं डीजल के रेट तय करती हैं। सरकार की सरपरस्ती में ऑयल कंपनियां बेखौफ होकर उपभोक्ताओं को लूट रही हैं। चुनाव के समय सरकार के इशारे पर पेट्रोल डीजल के रेट कम होना भी चुनावी रणनीति का एक हिस्सा है। तेल कंपनियों ने पिछले माहों में गैस की कीमतें भी बड़ी तेजी के साथ बढ़ाई हैं। सब्सिडी में भी लगातार शिकायतें मिल रही हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में रसोई गैस भी आम मतदाताओं के बीच बहुत बड़ा मुद्दा है। पांच राज्यों के चुनाव में गैस और पेट्रोल डीजल की कीमतें सरकार की लोकप्रियता को घटाकर, सरकार के लिए परेशानी का कारण बन रही है।

– ईएमएस