मोदी सरकार पर बरसे पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह


पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राफेल डील पर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार संयुक्त संसदीय समिति की जांच के लिए तैयार नहीं है।

:: राफेल डील पर उठाए सवाल, कहा- जेपीसी के लिए तैयार नहीं मोदी सरकार, मतलब दाल में काला है ::
:: नोटबंदी व बेतुके जीएसटी से मोदी सरकार ने आर्थ‍िक अराजकता पैदा की ::
:: मोदी सरकार के चंद महीने शेष, 2 करोड़ नौकरी का वादा जुमला ::

इन्दौर (ईएमएस/आनंद पुरोहित)। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को राफेल डील पर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सरकार राफेल सौदा में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच के लिए तैयार नहीं है। इसका मतलब है कि दाल में कुछ काला है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार सालों से हमारा देश बहुत चुनौतीपूर्ण समय से गुजर रहा है। नोटबंदी व जीएसटी के नासमझ व बेतुके फैसलों तथा ‘सरकार प्रायोजित टैक्स टेररिज़्म’ ने संगठ‍ित व असंगठित क्षेत्रों पर कड़ा प्रहार किया है। आज किसान निराश हैं और युवा बेरोजगार। आम जनता महंगाई की मार, खासकर डीज़ल-पेट्रोल और रसोई गैस के बढ़ते दामों से जूझ रही है। देश की सुरक्षा ख़तरे में है। महिलाऍं असुरक्ष‍ित है। गरीब व कमजोर सरकारी संरक्षण में हो रहे अत्याचारों का श‍िकार है।

यह बातें पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने कभी मध्यप्रदेश के साथ भेदभाव नहीं किया, इसके गवाह राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह खुद हैं। मनमोहन ने किसान आंदोलन, व्यापमं, नोटबंदी, महंगाई और किसानों की समस्या जैसे मुद्दे उठाए। इस मौके पर पत्रकारों को जारी लिख‍ित बयान में कहा गया कि नोटबंदी व जीएसटी के नासमझ व बेतुके फैसलों तथा ‘सरकार प्रायोजित टैक्स टेररिज़्म’ ने संगठ‍ित व असंगठित क्षेत्रों पर कड़ा प्रहार किया है। छोटे, मंझोले और लघु उद्योग व व्यवसाय नोटबंदी और जीएसटी की दोहरी मार से बंद होने की कगार पर हैं। मोदी सरकार नोटबंदी को सही साबित करने के लिए हर रोज एक झूठी कहानी गढ़ने में व्यस्त है। लेकिन सच्चाई और वास्तव‍िकता यह है कि नोटबंदी मोदी सरकार द्वारा लागू की गई एक भयावह व ऐतिहासिक भूल साबित हुई है।

नोटबंदी का कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ। न तो 3 लाख करोड़ रू. का काला धन पकड़ा गया, जिसका दावा मोदी सरकार ने 10 नवम्बर 2016 को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष किया था और न ही ‘जाली नोटों’ पर लगाम लगी। आतंकवाद और नक्सलवाद को रोकने के दावे भी खोखले साबित हुए।
डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि असल में नोटबंदी छोटे एवं मंझोले उद्योगों व व्यवसायों, किसानों और गृहण‍ियों की जीवनभर की बचत पर एक सोचा समझा हमला था। अनेकों खुलासों ने यह साफ कर दिया है कि नोट बंदी किस प्रकार रातों-रात काले धन को सफद बनाने की संदेहपूर्ण स्कीम थी, जिसने बैंकों की लाइनों में खड़े 120 साधारण लोगों की जान ले ली। इसके साथ ही मोदी सरकार की सरपरस्ती में पुराने नोटों को नए नोटों में बदलने का एक समानांतर धंधा भी चलता रहा। एक तरफ तो साल 2014 के चुनाव में स्व‍िस बैंक के खातों में जमा भारत का अरबों-ख़रबों डॉलर का कालाधन वापस लाने का मोदीजी का वादा खोखला साबित हुआ, वहीं दूसरी तरफ हर भारतीय के खाते में 15-15 लाख रू. जमा करवाने के वादे की भी हवा निकल गई।

:: कहां गए रोज़गार व नौकरियॉं?

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि मोदीजी द्वारा साल 2014 में युवाओं के लिए हर साल 2 करोड़ नौकरियॉं पैदा करने का वादा भी एक झूठा छलावा साबित हुआ है। रोजगार बारे एकमात्र विश्वसनीय स्त्रोत श्रम ब्यूरो का तिमाही सर्वे है। इन आंकड़ों से खुलासा हुआ है कि हर तिमाही केवल कुछ हजार रोजगार ही उत्पन्न हो पाए। ये आंकड़ें दो करोड़ नौकरियॉं देने के अच्छे दिन के झूठे वादों की पोल खोलते है। क्या कारण है कि सरकार ने अक्टूबर-दिसम्बर 2017 में श्रम ब्यूरों के रोजगार के आंकड़े जारी ही नहीं किये? उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में स्थ‍ित‍ि और विकट है। उदाहर के तौर पर फरवरी 2018 में चपरासी के 738 पदों के लिए एमबीए, एलएलबी, बीई, पीएचडी तथा अन्य शैक्षण‍िक योग्यता वाले 2 लाख 81 हजार युवाओं ने आवेदन किया, जो व्यापक बेरोज़गारी की स्थ‍ित‍ि दर्शाता है। 14 साल की अवध‍ि में मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार रोज़गार उत्पन्न करने में फेल साबित हुई है।

:: देश के प्रतिष्ठ‍ित संस्थानों पर हमला, सुनियोजित प्रयास ::

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में देश के प्रतिष्ठ‍ित संस्थानों की विश्वसनीयता पर लगातार सुनियोजित तरीके से हमला हुआ है। सत्ताधारियों द्वारा संस्थाओं को कमजोर करने का यह सोचा समझा तथा योजनाबद्ध प्रयास है। लोकतंत्र व कानून का शासन आज ख़तरे में है। हमें मिलकर संस्थानों पर होते इन हमलों का सामना करना पड़ेगा, अन्यथा इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। शासन में पारदर्श‍िता व भ्रष्टाचार के खात्मे के वादे पर यह सरकार सत्ता में आई थी। सरकार का कार्यकाल पूरा होने में केवल कुछ महीने ही शेष बचे है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की नाक के नीचे भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। राफेल सौंदे में हुई पूरी गड़बड़ी की जॉंच अनिवार्य तौर पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराए जाने की आवश्यकता है।

:: मध्य प्रदेश में घोटालों का बोलबाला ::

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में घोटालों का बोलबाला है। व्यापम घोटाले ने 77 लाख युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेल दिया और अब तक व्यापम से जुड़े 50 से अध‍िक लोग अपनी जान गंवा चुके है। ‘ई-टेंडर’ घोटाले में कुछ चुनिंदा निजी कम्पनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी बोलियों में बड़े पैमाने पर फेरबदल का इल्ज़ाम जगजाहिर है। भाजपा सरकार की सरपरस्ती में भारत की सबसे पवित्र नदियों में से एक, नर्मदा नदी पर रेत माफ‍िया की लूट भी सार्वजनिक है। चाहे प्यार खदीद घोटाला हो, या दाल खरीद घोटाला या फिर कृष‍ि पम्प सब्‍स‍िडी घोटाला, मध्य प्रदेश में पूरी जॉंच और जिम्मेदारी तय किये जाने को लगातार दबा दिया जाता है।

:: मोदी-श‍िवराज सरकारों की नीतियॉं किसान विरोधी ::

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सहित पूरे देश का किसान पीड़ा में है। मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या को मजबूर है। राज्य में हर पॉंच घंटे में एक किसान आत्महत्या करता है। दुखद बात यह है कि 2004 से 2016 के बीच मध्य प्रदेश में लगभग 17 हजार किसानों ने आत्महत्या कर ली। इससे भी ज्यादा दुख की बात यह है कि रायसेन में भाजपा सरकार ने एके-47 की गोलियॉं दागकर किसानों की हत्या कर दी। मंदसौर की पुलिस फायरिंग में जिस निर्दयता से आधा दर्जन किसान मौत की घाट उतार दिए गए, उसे आज भी देश नहीं भुला पाया है। इसके बाद भी किसान को कर्ज से कोई राहत नहीं दी गई।

:: ”न्यूनतम समर्थन मूल्य = लागत + 50 प्रतिशत मुनाफा” एक और जुमला बना ::

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि यह कड़वा सच है कि म.प्र. के किसान को अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एनएसपी) भी नहीं मिल रहा, चाहे वह सोयाबीन पैदा करने वाला किसान हो या फिर मूंगफली, अरहर, उड़द या अन्य फसलों की पैदावार हो। दूसरी ओर खाद, कीटनाशक दवाइयों और कृष‍ि उपकरणों पर जीएसटी लगाने तथा डीएफपी एवं पोटाश खाद के बेतहाशा बढ़ते मूल्यों ने किसानों के कंधों पर असहनीय भार डाला है। मध्य प्रदेश में तो भावांतर भुगतान योजना बूरी तरह से पिट गई। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना लागू किये जाने के बाद से फसल बीमा के अंतर्गत आने वाले किसानों की संख्या में केवल 0.42 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कम्पनियों को दी जाने वाली प्रीमियम राश‍ि 350 प्रतिशत बढ़ गई। इस योजना के क्रियान्वयन के केवल एक साल बाद ही 85 लाख किसान योजना से बाहर निकल गए। मध्य प्रदेश में पिछले साल सूखा पड़ा था, इसके बावजूद मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर के किसानों को मात्र 4.70 रू. से लेकर 194 रू. के बीच भुगतान मिला। राज्य में पीएमएफबीवाई में नामांकित 69 लाख किसानों में से केवल 16 लाख को ही इसका फायदा मिला।

:: महिलाओं, बच्चों, आदिवास‍ियों एवं स्वास्थ की घोर उपेक्षा ::

डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि किसी भी राज्य की प्रगति का एक महत्वपूर्ण मापदंड महिलाओं, बच्चों तथा आदिवास‍ियों का विकास व स्वास्थ सेवाओं का सुप्रबंधन है। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों में मध्य प्रदेश में बलात्कार और अपहरण के मालों में बच्च‍ियों और महिलाओं पर विकट हमलों का खुलासा हुआ है। बच्चों के ख‍िलाफ अपराध और लापता बच्चों की बढ़ती संख्या गंभीर चिंता का विषय है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2016 के अनुसार 48 लाख बच्चे मध्यप्रदेश में कुपोषण का श‍िकार है। शिशु मृत्युदर अत्यध‍िक ऊँचे स्तर पर है। पीड़ा की बात है कि मध्य प्रदेश में 90 हजार से अध‍िक बच्चें अपनी पहली सालग‍िरह मनाने तक जीवित नहीं रह पाते। उन्होंने कहा कि म.प्र. में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर दयनीय स्थ‍िति‍ में है। देश के 21 बड़े राज्यों में मध्य प्रदेश हेल्थकेयर सेवाओं में 17वें पायदान पर है। स्वास्थ्य पर प्रतिव्यक्ति खर्च मात्र 716 रू. है। यहां तक प्राथमिक हेल्थकेयर सेंटरों में डॉक्टरों के 1117 स्वीकृत पदों में से, 817 पद रिक्त है। मैटरनि‍टी, महिला, चाईल्ड स्पेश‍ियलिस्ट के 1236 स्वीकृत पदों में से 1056 पद रिक्त पड़े है। उन्होंने कहा कि हमारे आदिवासी भाई-बहन सरकार की बेरूखी के श‍िकार है। म.प्र. सरकार ने 363424 आदिवासी पट्टों के दावे खारिज कर दिए। यहां तक कि वन उत्पादों का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी पर्याप्त नहीं दिया जा रहा है। ख्यात अर्थशास्त्री, कांग्रेस वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि आज मध्य प्रदेश और भारत दोराहे पर खड़े है। दशकों के बाद मध्य प्रदेश के बुद्धिमान, साहसी एवं उद्यमी नागरिकों के लिए एक बार फिर कांग्रेस पार्टी में अपना भरोसा प्रदर्श‍ित करने का समय आ गया है। मध्य प्रदेश के लोगों का हाथ में हाथ ले कांग्रेस पार्टी राज्य को नई ऊँचाइयों और सुनहरे भव‍िष्य की ओर ले जाने को कट‍िबद्ध है।