मनमोहन सिंह को लेकर टेन्शन में है कांग्रेस, लगा रही जुगाड़


कांग्रेस को राज्यसभा सीट जीतना जरूरी

नई दिल्ली (ईएमएस)। आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लगातार दूसरी बार सत्ता में आने से रोकने के अलावा कांग्रेस के सामने एक और टेन्शन है। यह टेन्शन है पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राज्यसभा सीट जीताने की चुनौती। इसीलिये उनके लिये एक अदद सीट के जुगाड़ के लिये माथापच्ची की जा रही है।

पार्टी के लिए जहां लोकसभा की एक-एक सीट अहम है, वहीं पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के लिए राज्यसभा की एक सीट तय करना चाहती है। डॉ. सिंह का कार्यकाल जून में पूरा हो रहा है। डॉ. सिंह असम से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल 14 जून को पूरा हो रहा है। पर असम में पार्टी के पास राज्यसभा सीट जीतने के लिए जरूरी विधायक नहीं है। जुलाई में तमिलनाडु की राज्यसभा की छह सीट खाली हो रही हैं। इनमें डीएमके गठबंधन को दो सीटें मिल सकती हैं।

पार्टी के एक नेता ने कहा कि डीएमके डॉ. सिंह को राज्यसभा के लिए समर्थन दे सकता है, पर उनकी एक सीट कनिमोई और दूसरी सीट सीपीआई के डी. राजा को मिल सकती है। ऐसे में कांग्रेस के पास सुरक्षित विकल्प पंजाब है। पर वहां कोई सीट खाली नहीं है। असम और तमिलनाडु के बाद अगले साल अप्रैल तक किसी राज्य में राज्यसभा की सीट खाली नहीं हो रही है। ऐसे में कांग्रेस के पास पंजाब में सीट खाली कराने के अलावा और विकल्प नहीं है।

यह भी कयास है कि मनमोहन सिंह अमृतसर से चुनाव लड़ सकते हैं, पर इसकी संभावना कम है। ऐसे में कांग्रेस पंजाब से किसी राज्यसभा सदस्य से इस्तीफा दिलाकर उसे लोकसभा चुनाव लड़ा सकती है। प्रताप सिंह बाजवा ने पूर्व प्रधानमंत्री के लिए राज्यसभा सीट छोड़कर लोकसभा लड़ने का भी ऐलान कर दिया है। अंबिका सोनी भी चुनाव लड़ती है तो राज्यसभा से इस्तीफा दे सकती हैं। बाजवा ने 2009 के चुनाव में गुरुदासपुर सीट से जीत दर्ज की थी। पर 2014 के चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर विनोद खन्ना से हार गए। इसके बाद अप्रैल 2016 में बाजवा राज्यसभा के लिए चुने गए। लिहाजा, इस बार बाजवा को लोकसभा सीट बदलनी होगी। गुरुदासपुर सीट से सांसद विनोद खन्ना के निधन पर बाद हुए उप चुनाव में कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने जीत दर्ज की। ऐसे में प्रताप सिंह बाजवा राज्यसभा से इस्तीफा देते हैं तो उन्हें अमृतसर से चुनाव लड़ना पड़ सकता है।