चुनावी खर्च की वजह से बैंकिंग सिस्टम में तरलता में 70 हजार करोड़ रुपये की कमी आ गई


देश में चल रहे लोकसभा चुनाव का असर बैंकिंग और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है।
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मुंबई। देश में चल रहे लोकसभा चुनाव का असर बैंकिंग और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। दरअसल, सुस्त सरकारी खर्च और अधिक चुनावी खर्च की वजह से बैंकिंग सिस्टम में 70 हजार करोड़ रुपये की तरलता कम हो गई है, इससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा रेकॉर्ड पूंजी झोंकना और ब्याज दरों में कटौती जैसे उपायों का प्रभाव कम हो गया है। एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य ने कहा, ‘सिस्टम में तरलता में कुछ कमी आई है, जोकि साल के इस समय सामान्य है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इसका कारण कम खर्च की वजह से सरकार का आरबीआई के साथ अपेक्षाकृत अधिक बैलेंस हो सकता है।

अधिक कैश निकासी, कमजोर विदेशी मुद्रा आवक और बैंकों का ऊंचा सूआरआर (कैश रिजर्व रेशियो) बैलेंस जैसे अन्य कारक भी हैं।’ ब्लूमबर्ग के आकंड़ों के मुताबिक 16 अप्रैल को डेफिसिट 70,266 करोड़ रुपये था, जबकि 3 अप्रैल को यह 31,396 करोड़ रुपये था। इसी अवधि में सिस्टम में, नोटंबदी के बावजूद सिस्टम में 33,400 करोड़ से लेकर 84,600 करोड़ रुपये तक कैश सरप्लस था। कोटक महिंद्रा बैंक में वरिष्ठ अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज ने कहा, ‘तरलता में कमी से मौद्रिक नीति के सहज बदलाव में बाधक होगा। डेफिसिट बढ़ने का एक प्राथमिक कारण सरकार के खर्च में अप्रत्याशित कमी हो सकता है।’ सरकार के पास कैश बैलेंस सरप्लस 16 अप्रैल को 47,333 करोड़ रुपये थे जोकि पिछले साल इसी अवधि में शून्य था। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक तरलता में कमी 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की हो सकती है।

– ईएमएस