पति के दीर्घायु के व्रत के बाद भी भारतीय विदेशी पतियों से कम जीते हैं


'करवाचौथ' का त्योहार भी भारतीय स्त्रियां पति की दीर्घायु के लिए ही करती हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर। (Photo: IANS)

नई दिल्ली। कहा जाता है दवा से ज्यादा दुआ में असर होता है इसलिए भारत में तीज त्योहार, पूजा, उपवास का महत्व कुछ अधिक होता है। ‘करवाचौथ’ का त्योहार भी भारतीय स्त्रियां पति की दीर्घायु के लिए ही करती हैं। इस त्योहार पर शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। लेकिन 2011 की जनगणना के तथ्यों पर गौर करें तो यह बात सच से काफी दूर दिखती है।

जनगणना के अनुसार भारत में 58 करोड़ 64 लाख महिलाएं हैं। जिनमें से आधी से ज्यादा शादीशुदा हैं। यानि भारत में करीब 30 करोड़ महिलाएं शादीशुदा हैं। इस आधार पर कह सकते हैं कि भारत में करोड़ों महिलाएं आज अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगीं। लेकिन सालों से महिलाओं के लंबी उम्र के लिए व्रत रखे जाने के बावजूद भारत में पतियों की उम्र दुनिया भर के पतियों के मुकाबले लंबी नहीं हो पाई है।

2017 में जापान की कुल जनसंख्या 12 करोड़ 68 लाख है। जिनमें कुल 6 करोड़ 18 लाख आदमी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 50 साल की उम्र (फर्टिलिटी की उम्र तक) हर 4 में से 1 यानि एक चौथाई जापानियों की शादी नहीं होती। यानि जापान में कुल पति 4 करोड़ 6 लाख हैं। दुनिया भर में लोगों की औसत आयु सबसे ज्यादा जापान में है। वैसे यहां लगभग सारे ही लोग 83 साल से ज्यादा जीते हैं लेकिन मर्दों की औसत उम्र करीब 81 साल है। वैसे महिलाओं की औसत उम्र यहां 86 साल है।

2017 में स्विट्जरलैंड की कुल जनसंख्या 84 लाख 20 हज़ार के आसपास थी। जिनमें से 41 लाख 73 हज़ार से कुछ ज्यादा व्यक्ति पुरुष थे। लेकिन इनमें से केवल 18 लाख 13 हज़ार ही शादीशुदा थे। दुनिया भर में आदमी सबसे ज्यादा स्विट्जरलैंड में जीते हैं। यहां आदमियों की औसत उम्र 81 साल से ज्यादा होती है। वहीं भारत में आदमियों की कुल जनसंख्या 62 करोड़ 37 लाख के करीब है। जिनमें से 33 करोड़ 36 लाख से ज्यादा शादीशुदा हैं यानि पति बन चुके हैं। दुनिया भर में सबसे ज्यादा उम्र तक जीने के मामले में भारतीयों का नंबर 125वें पर आता है। यहां पुरुष औसतन 67 साल तक ही जीते हैं और महिलाएं करीब 70 साल तक।

बताते चलें कि हम यहां हर आदमी को पति नहीं मान रहे बल्कि पतियों को ही पति मान रहे हैं क्योंकि दुनिया भर में शादी और उम्र के संबंध को लेकर कई स्टडीज हो चुकी हैं और ज्यादातर स्टडीज में पाया गया है कि शादीशुदा मर्द, गैर-शादीशुदा और तलाक ले चुके मर्दों से ज्यादा जीते हैं। ऐसे में यहां जो देश के कुल आदमियों की औसत आयु दी हुई है, उनमें पतियों की औसत आयु कुछ ज्यादा ही होगी। हालांकि इसके पीछे कोई वैज्ञानिक कारण होने के बजाए केवल लाइफस्टाइल से जुड़े कारण होते हैं।

दरअसल शादी के बाद इंसान के लिए इमोशनल सपोर्ट मिल जाता है और स्ट्रेस लेवल कम होता है। साथ ही दुनियाभर में ज्यादातर परिवारिक काम महिलाओं के हाथों में होते हैं। जिसके चलते शादीशुदा मर्दों की खान-पान और पोषण से जुड़ी स्थितियां भी दूसरे मर्दों की तुलना में आरामदायक स्थिति में होती हैं। ऐसे में उनका कुछ साल ज्यादा जीना कोई आश्चर्य की बात नहीं।

– ईएमएस

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