रिटेल क्षेत्र के लिए नोटबंदी, जीएसटी अच्छे कदम : राजगोपालन


नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाने वाला रिटेल यानी खुदरा क्षेत्र आम लोगों की जिंदगी से पूरी तरह जुड़ा है। नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर से हुए नुकसानों पर सभी का ध्यान है, लेकिन रिटेल क्षेत्र को इन दोनों बदलावों से मिले फायदों की अनदेखी नहीं की जा सकती है। यह कहना है रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुमार राजगोपालन का।

हाल ही में नई दिल्ली में रीटेल उद्योग से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा व संभावनाओं पर चर्चा के लिए दो दिवसीय एक्सपो का आयोजन किया गया था।

इस मौके पर राजगोपालन ने आईएएनएस को एक खास बातचीत में बताया कि रिटेल उद्योग में क्या बदलाव और सुधार हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “देखिए, हम दैनिक जीवन में जिन वस्तुओं जैसे टूथपेस्ट, साबुन, शैंपू, कपड़े आदि का इस्तेमाल करते हैं, वह सभी सभी रिटेल के दायरे में आते हैं। इसलिए यहां आने वाले बदलावों को सीधा असर आम आदमी पर पड़ता है। रिटेल के क्षेत्र में हाल के समय में सबसे बड़ा सुधार यह देखने को मिला है कि आज के समय में हर कोई सहूलियत के हिसाब से व्यापार करना चाह रहा है। ऐसे में तकनीक अहम किरदार निभा रही है।”

उन्होंने कहा, “इस साल के सेमिनार का विषय भी ‘इनोवेशन, डिजिटल एवं डिजाइन के माध्यम से सफल रिटेल’ था। ऑनलाइन खरीदारी का जमाना है, इसलिए हमने ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए रिटेल क्षेत्र में तकनीक को अधिक सुगम व समावेशी बनाने का प्रयत्न किया है।”

सरकार की तरफ से ऐसे क्या बदलाव हुए हैं जिससे रिटेल पर कोई प्रभाव पड़ा हो? इस पर उन्होंने कहा, “सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था में दो बड़े बदलाव किए हैं। पहला नोटबंदी और दूसरा वस्तु एवं सेवा कर, मैं मानता हूं कि यह दोनों लोगों को हिला देने वाले फैसले थे, लेकिन अब नहीं तो कब? यह सवाल है। अगर आप डिजिटल युग में शामिल होना चाहते हैं तो हमें कैशलैस होना पड़ेगा। बैंक में जितना पैसा आया है वह लोगों की सुविधाओं पर ही खर्च होगा।”

उन्होंने कहा, “अगर हम वास्तव में आधुनिकता की ओर जाना चाहते हैं तो हमें उस पैसे को कैश में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जो कि हम पूरी तरह से कर रहे हैं। हमें सोचना चाहिए, कैसे देश को आगे ले जाएं..कैसे देश में प्रति व्यक्ति आय दो हजार डॉलर से ऊपर हो। आप अगर ऐसा सोचते हैं तो इसके लिए कड़े कदम तो उठाने होंगे। यह एक कड़वी दवा है, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को स्वस्थ करने के लिए कड़वी दवा तो खानी पड़ेगी।”

कुमार कहते हैं, “अब बात आती है वस्तु एवं सेवा कर की। हम कहते हैं कि भारत एक देश है लेकिन.. व्यापार के मामले में अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग नियम हैं। उदाहरण के लिए, पहले जब हम मुंबई में कोई व्यापार करते थे और दूसरे राज्यों में माल बेचना होता था तो उसके लिए हमें मुंबई से थोड़ा बाहर 30 किलोमीटर की दूरी पर एक और वेयरहाउस (गोदाम) लगाना पड़ता था क्योंकि बाहर का माल अंदर लाने पर इसका शुल्क देना पड़ता था।”

उन्होंने कहा, “मुंबई से गुजरात माल आयात-निर्यात में दोहरे करों के चरणों से गुजरना होता था और भी कई तरह के सेवा कर व खर्चे होते थे। अब इन सब चीजों में काफी बदलाव आया है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि लोगों पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन लोगों को सोचना चाहिए कि इसका उन्हें लंबे समय में फायदा मिलेगा।”

एक्सपो रिटेलर्स और उपभोक्ता दोनों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकते हैं? उन्होंने कहा, “सबसे पहला फायदा यह है कि एक्सपो से आम लोगों, सरकारी प्रतिनिधिमंडल, एक्सपो प्रदर्शनी में भाग लेने वाले और वक्ताओं को कुछ न कुछ नया सीखने को मिलता है, वे यहां से नए संपर्क बनाकर जाते हैं। सेवा प्रदाताओं को नए ग्राहक मिल जाते हैं। कई बार ऐसा होता है कि कोई सेवा प्रदाता किसी ग्राहक के साथ पहले से काम कर रहा होता है, लेकिन इन गतिविधियों के माध्यम से उनका संपर्क और मजबूत हो जाता है।”

वह कहते हैं, “सबसे बड़ी बात है कि सरकार के प्रतिनिधि यहां आए लोगों को सरकारी की योजनाओं और सुधारों के बारे में विस्तार से बताते और समझाते हैं। यह लोगों पर निर्भर करता है कि कौन क्या फायदा और मदद चाहता है। उदाहरण के लिए भारत के खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार अग्रवाल ने ‘ईट हेल्दी थॉट प्रॉसेस’ पर चर्चा की, जिससे हर कोई खुद को जोड़ सकता है।”

वह कहते हैं, “हमारा सबसे बड़ा उद्देश्य रिटेलिंग को नए स्तर पर ले जाना है। ऐसी गतिविधियां रिटेलर्स, सरकारी अधिकारियों, मीडिया और आम लोगों को एक मंच पर लाती है और विचारों का आदान-प्रदान होता है।”

-आईएएनएस