दिल्ली हिंसा : दंगाइयों ने जलाया जवान का घर, बीएसएफ ने दिए 10 लाख


नई दिल्ली (ईएमएस)। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) दिल्ली हिंसा में अपना घर खोने वाले कांस्टेबल की मदद के लिए आगे आया है। उत्तर पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके में दंगाइयों ने बीएसएफ कांस्टेबल मोहम्मद अनीस के घर में आग लगा दी थी। कांस्टेबल ने इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को नहीं दी थी। जब मीडिया रिपोर्ट के जरिए बीएसएफ को इसका पता लगा तो उन्होंने जवान के पिता से संपर्क किया और उसके परिवार की मदद के लिए शनिवार को खजूरी खास उसके घर राहत सामग्री लेकर पहुंचे। जवान ओडिशा में तैनात है। बीएसएफ के डीआईजी पुष्पेन्द्र सिंह राठौर अपनी टीम के साथ राहत सामग्री लेकर पहुंचे थे।

 

डीआईजी पुष्पेन्द्र सिंह राठौर का कहना है कि बीएसएफ की तरफ के अनीस का मकान ठीक कराया जाएगा और 10 लाख रु की आर्थिक मदद भी दी जाएगी। अनीस अभी ओडिशा में तैनात हैं और जल्द ही दिल्ली ट्रांसफर किया जाएगा। 25 फरवरी को दिल्ली में दंगे के दौरान जवान अनीस के पिता मोहम्मद मुनिस (55), चाचा मोहम्मद अहमद (59) और 18 वर्षीय चचेरे बहन नेहा परवीन मौजूद थी, जब दंगाइयों ने उनके घर पर हमला किया था।दंगा

प्रभावित इलाकों में सामान्य होते हालात उत्तरपूर्वी दिल्ली में शनिवार सुबह हालात शांतिपूर्ण रहे। स्थानीय निवासी इस सप्ताह की शुरुआत में इलाके में हुए साम्प्रदायिक दंगों में पहुंचे नुकसान से धीरे-धीरे उबरने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षाकर्मी फ्लैग मार्च निकाल रहे हैं और स्थानीय लोगों का डर खत्म करने के लिए रोज उनसे बातचीत कर रहे हैं। वे स्थानीय निवासियों से सोशल मीडिया पर अफवाहों पर ध्यान न देने तथा उसकी पुलिस में शिकायत करने का अनुरोध कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार दिल्ली सरकार एक व्हाट्सएप नंबर जारी करने पर विचार कर रही है जिस पर लोग इस मैसेजिंग एप पर प्रसारित किए जा रहे घृणा संदेशों के बारे में शिकायत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों से ऐसे संदेश आगे न भेजने की अपील करेगी क्योंकि समुदायों के बीच शत्रुता पैदा करने वाले ऐसे संदेशों को प्रसारित करना एक अपराध है। इस कदम का मकसद सोशल मीडिया पर अफवाहों से निपटना है।

दंगा पीड़ितों के रिश्तेदार जीटीबी अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर अपने परिजन के शव मिलने के लिए इंतजार में बैठे हैं। उत्तरपूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में हिंसा में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हो गए। संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा है। उग्र भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया है।