टेलीप्रजेंस व्यवस्था शुरू करने वाला देश का पहला कोर्ट बना दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आपको अत्याधुनिक करते हुए टेक्नोलॉजी से जुड़ी व्यवस्था में एक कदम और आगे बढ़ाया है।
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नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आपको अत्याधुनिक करते हुए टेक्नोलॉजी से जुड़ी व्यवस्था में एक कदम और आगे बढ़ाया है। दरअसल कोर्ट ने खुद को अत्याधुनिक करते हुए अपने यहां टेलीप्रजेंस व्यवस्था को जोड़ा है जिसके जरिए वह दूरदराज इलाके की कोर्ट के साथ बैठक के अलावा सुनवाई भी कर सकता है। इससे एक तरफ लंबित मामलों के जल्द निपटारा करने में मदद मिलेगी तो दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने से समय की भी बचत होगी। इसका उद्घाटन आज सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर ने हाईकोर्ट के जज लाउंज में किया। टेलीप्रजेंस व्यवस्था से जुड़ने वाला दिल्ली हाई कोर्ट देश का पहला हाईकोर्ट है। यह एक तरह की टेली कॉन्फ्रेंसिंग जैसी ही व्यवस्था है जिसमें एक साथ कई लोगों के साथ एक ही समय बैठक की जा सकती है और उनकी बात सुनने के अलावा दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया जा सकता है।

बेहतर और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके इसके जरिए मिलने वाली आवाज और फोटो काफी स्पष्ट होंगे। यह व्यवस्था किसी को भी सीधे संपर्क से जोड़ती है। इसमें एक साथ अलग-अलग जगहों से १८ लोगों को एक साथ जोड़ा जा सकता है। यह उन सभी को आमने-सामने बैठे होने का आभास कराएगी। ज्यादातर इसका उपयोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था, आईपी फोन, डेस्कटॉप, लैपटाप, टैबलेट, मोबाइल आदि के जरिए किया जा सकता है।

टेलीप्रजेंस व्यवस्था का उद्घाटन करते हुए न्यायमूर्ति लोकुर का कहना है कि नई तकनीकी व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लाने वाली होगी। यह न्याय व्यवस्था की गुणवत्ता को बढ़ाएगा। सभी को आधुनिक सूचना तकनीकी का इस वक्त इस्तेमाल करना चाहिए। जब साल २००२ में कंप्यूटर शुरू हुआ था तो कई कर्मचारियों ने अपना काम काफी बढ़ जाने की बात बोली थी। लेकिन बाद में उन्हीं कर्मचारियों ने एक से २ हफ्ते में अपना काम का वजन आधा कम हो जाने की बात कही यानी तकनीकी के इस्तेमाल ने उनके कामों को काफी आसान कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट पर पूरे देश की नजरें रखती हैं।

– ईएमएस