कांग्रेस : 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 0 सीटें, और सपना सरकार बनाने का


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लोकसभा चुनाव परिणामों की घोषणा की जा चुकी है। नरेन्द्र मोदी लगातार दूसरी बार स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने जा ररहे हैं। उधर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस को पूरे देश में केवल 52 सीटों पर जीत हासिल हुई है। लोकसभा में नियमानुसार विपक्षी दल का पद प्राप्त करने के लिये किसी भी पार्टी को कम से 55 सीटों की आवश्यकता रहती है। यानि इस पद का वह दावा भी नहीं कर सकती।

खैर, कांग्रेस पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान जनता के समक्ष बड़े-बड़े वादे किये और यूपीए एवं अन्य विपक्षी दलों के सहयोग से सरकार बनाने का दावा भी पेश किया। लेकिन कांग्रेस का दावा अंदर से कितना खोखला था यह नतीजे बयान कर रहे हैं। जो दल केंद्र में सरकार बनाना चाह रहा हो, उसे देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक अदद सीट भी नहीं मिली है।

जी हां, कांग्रेस ने 21 राज्यों में अपना खाता तक नहीं खोला है। ये राज्य हैं गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, ओडिशा, असम, आंध्रप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तराखंड, तमिलनाडु, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा नगर हवेली, दमन दीव, अंडमान निकोबार, लक्षदीप और ‌त्रिपुरा। बेशक केंद्र शासित प्रदेशों की सीटें एक होंगी लेकिन बड़े प्रदेश भी हैं जहां खाता नहीं खुलना कांग्रेस की सांठिनिक ताकत खत्म होने का द्योतक है। दूसरा, पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में भी सीटों में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। इसका अर्थ है पांच वर्षों में जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और नये नेताओं की पौध तैयार करने के कोई प्रयास नहीं किये गये। खैर, सच्चाई तो यह है कि जब तक कोई दल पूरे देश के तमाम राज्यों में लोकसभा सीटें जीतने का माद्दा नहीं रखता, तब तक सरकार बनाने का दावा नहीं कर सकता। भारजीय जनता पार्टी आज सही मायनो में राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बन गई है जो लगभग हर प्रदेश में अपनी पैठ बना चुकी है इसी का नतीजा है कि इस बार अपने बूते 303 सीटें जीतने में कामयाब रही है।