मोदी का दस किमी लंबा रोड़ शो करके दमखम दिखाने की हो रही तैयारी


तीन लोक से न्यारी काशी से प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं, वहीं विपक्ष ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।
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अगले दिन बाबा विश्वनाथ के दर्शनकर भरेंगे नामांकन

वाराणसी। तीन लोक से न्यारी काशी से प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं, वहीं विपक्ष ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। भाजपा के उच्‍च पदस्‍थ सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी 25 अप्रैल को वाराणसी आएंगे और लंका से दशाश्वमेध घाट तक करीब 10 किलोमीटर लंबा रोड शो करके शक्ति प्रदर्शन करेंगे। अगले दिन वह बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर वाराणसी संसदीय सीट से नामांकन करेंगे। इससे पहले वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ने वाराणसी आने के बाद मलदहिया से कचहरी इलाके तक विशाल रोड शो करने के बाद नामांकन किया था। मोदी का चुनावी दफ्तर शहर के रविंद्रपुरी इलाके में खुलेगा। भाजपा काशी क्षेत्र के अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव ने चैत्र नवरात्र के पहले दिन यानी छह अप्रैल से मोदी का चुनावी कार्यालय काम करने लगेगा।

बताया जा रहा है कि रोड शो के जरिए पीएम मोदी पूरे पूर्वांचल को साधने की कोशिश करेंगे। उधर, धर्म नगरी काशी एक बार फिर यूपी के सियासी तापमान का बैरोमीटर बनने को तैयार है। गंगा की शांत धारा के किनारे सियासी लहरें उफान मारेंगी। यहां की लोकसभा सीट पर पहले से लेकर अब तक का चुनाव हमेशा ही खास रहा है। कभी यह सीट प्रदेश ही नहीं देश में कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती रही तो अब आरएसएस की गहरी पैठ के चलते भगवा ब्रिगेड का मजबूत किला बनी है।

वाराणसी के मतदाताओं ने बाहरी उम्मीदवारों पर प्यार लुटाने में कभी कमी नहीं की। बनारस के न होने के बावजूद दिग्गज कम्युनिस्ट नेता सत्यनारायण सिंह से लेकर अनिल शास्त्री, श्रीचंद्र दीक्षित, डॉ. मुरली मनोहर जोशी और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने यहीं से दिल्ली तक का रास्‍ता तय किया। अब एक बार फिर दुनिया में वाराणसी के साथ भारत की नई पहचान बनाने वाले नरेंद्र मोदी चुनाव मैदान में होंगे तो उनके मुकाबले में कौन उतरेगा, यह सवाल हर किसी की जुबान पर है। आजादी के बाद से अब तक बनारस में हुए चुनाव के परिणामों पर गौर करें तो यह देश में समय-समय पर चलने वाली सियासी बयार की रफ्तार नापने का पैमाना रहा है। वर्ष 2014 का चुनाव काफी दिलचस्प रहा। कारण गुजरात से निकलकर देश की राजनीति में सक्रिय हुए नरेंद्र मोदी चुनाव मैदान में रहे और उनको चुनौती देने अरविंद केजरीवाल दिल्ली से बनारस पहुंचे थे। केजरीवाल तीन लाख से ज्यादा मतों से हार गए।

इससे पहले 2009 के चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को जेल में बंद मुख्तार अंसारी ने कड़ी चुनौती दी थी। 1980 के चुनाव में वह राजनारायण बनारस में पं. कमलापति त्रिपाठी के सामने थे जिन्होंने तीन बरस पहले ही रायरबरेली में इंदिरा गांधी को हराया था। ऐतिहासिक चुनाव में हालांकि राजनारायण को हार का सामना करना पड़ा। 1989 में बोफोर्स की आंधी में अनिल शास्त्री के सामने कांग्रेस उम्मीदवार श्यामलाल यादव नहीं ठहर पाए तो रामलहर में बनारसी न होने के बावजूद श्रीशचंद दीक्षित दिल्ली पहुंच गए थे। बनारस में शुरुआती तीन चुनाव को छोड़ दें तो 1984 से अब तक के तीन दशक से ज्यादा समय में कांग्रेस सिर्फ एक बार ही जीत दर्ज करा सकी है। 1991 से लेकर अब तक सिर्फ 2004 के चुनाव को छोड़ भगवा परचम ही लहरा रहा है। इसे चुनावी टोटका कहें या फिर संयोग, हैट्रिक लगाने वाले कांग्रेस के बाबू रघुनाथ सिंह और भाजपा के शंकर प्रसाद जायसवाल को जनता ने चौथी बार संसद पहुंचने का मौका नहीं दिया।

– ईएमएस