सिंधिया की शह के बाद क्या मध्यप्रदेश की सियासी बिसात पर मात खा जायेंगे कमलनाथ?


(Photo: IANS/Congress)

सिंधिया को राज्यसभा सीट और केंद्र सरकार में मंत्रीपद दिये जाने की संभावना

कांग्रेस का दंभ; सदन के पटल पर बहुमत सिद्ध करेंगे, हमारे विधायकों के साथ धोखा किया गया

मध्यप्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की उलटी गिनती शुरु हो गई है। कम से कम भाजपा खेमे में पिछले दो दिनों से जो उत्साह और सक्रियता देखी जा रही है, उससे तो यही प्रतीत हो रहा है।

आज दोपहर कांग्रेस के युवा नेता और मध्यप्रदेश की सियासी दुनिया में गहरी पैंठ रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी से त्यागपत्र की घोषणा कर दी। इसके तुरंत बाद कांग्रेस ने त्यागपत्र स्वीकार करने की जगह सिंधिया को पार्टी से निष्कासित करने का एलान कर दिया। कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को ही भाजपा में शामिल होने की चर्चा रही। लेकिन शाम होते होते खबरें आईं कि सिंधिया 12 मार्च को अपने समर्थकों के साथ भोपाल में भाजपा दामन थाम सकते हैं। चर्चा है कि सिंधिया को मोदी की केंद्र सरकार में मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता दी जा सकती है।

 

इन ऑपचारिकताओं के बीच ट्वीट तब आया जब भोपाल में विरोधी दल के नेता और भाजपा नेता गोपाल भार्गव ने विधानसभा स्पीकर से मुलाकात करते कांग्रेस से 19 विधायकों के त्यागपत्र की सूची थमा दी। उधर देर रात तक कांग्रेस के बागी विधायकों की संख्या 26 तक पहुंचने की खबरें सियासी आने लगीं।

भाजपा के स्पीकर एनपी प्रजापति के समक्ष दावा किये जाने के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने ‌विधायकों के साथ बैठक की और सभी को आश्वासन दिया कि सरकार बचा ली जायेगी। नाराज विधायकों को मनाने के लिये सज्जन सिंह वर्मा समेत तीन मंत्री कर्नाटक भेजे जायेंगे। हालांकि मुख्यमंत्री की बैठक में कांग्रेस के 88 विधायक की उपस्थित रहे। लेकिन कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि जिन विधायकों के त्यागपत्र दिये जाने का भाजपा द्वारा दावा किया जा रहा है, वह गलत है। दरअसल विधायकों से सिंधिया के राज्यसभा सीट पर समर्थन के लिये हस्ताक्षर कराये गये जिन्हें विधानसभा से इस्तीफे के रूप में पेश कर दिया गया।

देर शाम शुरू हुई रिसोर्ट राजनीति

देर शाम भाजपा की संसदीय समिति की बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी शुरु हो गई कि भाजपा ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिये भोपाल से ‌अन्य जगहों पर शिफ्ट किया जायेगा।

 

गेंद स्पीकर के पाले में

कांग्रेस के 19 विधायकों के इस्तीफे की सूची के बाद अब गेंद विधानसभा स्पीकर एनपी प्रजापति के पाले में चली गई है। वे विधायकों का इस्तीफा स्वीकार करते हैं या उसमें देरी होती है, इसी पर सारा खेल रहेगा। बता दें कि विगत वर्ष में कर्नाटक में जब इसी प्रकार सरकार अल्पमत में आई थी, तब वहां के स्पीकर ने यह कहकर त्यागपत्र स्वीकार करने से इंकार कर दिया था कि वे इस्तीफा देने वाले सभी विधायकों से प्रत्यक्ष बात करेंगे। यदि एमपी में भी स्पीकर यही रवैया अपनाते हैं तो सदन के पटल पर बहुमत सिद्ध करने के दिन को टाला जा सकता है और इसी बहाने कांग्रेस को बागी विधायकों को मनाने का समय मिल सकता है।