सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों को स्वाईन फ्लू होने के बाद सतर्क प्रशासन


(PC: zeenews.com)

देश की सुप्रीम कोर्ट के 5 न्यायाधीश इन्फ्लूएन्जा ए (एच1एन1) वायरस की चपेट में आ गये, जिसे आम भाषा में स्वाईन फ्लू के नाम से जाना जाता है। इस बाबत का खुलासा जस्टीस डीवाय चन्द्रचुड ने सोमवार को वकीलों के साथ बैठक में किया।

इस संबंध में चीफ जस्टीस ऑफ इंडिया शरद अरविंद बोबडे ने एक बैठक भी ली जिसमें वायरस को फैलने से कैसे रोका जाए इस पर विचार किया गया। बाद में कोर्ट परिसर में ही विशेष डिस्पेंसरी शुरु करने का निर्णय किया गया जिससे कोर्ट में मौजूद वकीलों और अन्य ‌अधिकारियों व कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा सुलभ हो सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पांच में से तीन जज चिकित्सा लाभ लेने के बाद पुनः कार्य में जुट गये हैं, जबकि शेष दो जज अभी भी चि‌कित्सारत हैं।

स्वाईन फ्लू फैलने के संबंध में कोर्ट परिसर में हो रहे घटनाक्रम में भी मामले की झलक मिलती रही। जस्टीस अरूण शर्मा ने वरिष्ठ वकील आर्यमान सुंदरम से कहा कि यदि उनकी तबियत ठीक न लगे तो वे कोर्ट न आएं। वहीं जस्टीस संजीवन खन्ना मार्स्क पहन कर ओपन कोर्ट में बैठै जिससे वकील और स्टाफ डरे-सहमे नजर आए।

इस बाबत स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी एक स्पष्टीकरण जारी किया कि सभी पांच जजों को उनके घरों में आईसोलेशन में रखा गया था और उनमें से तीन जज अब ठीक हैं और काम पर लौट आए हैं। अन्य दो जज अभी चिकित्सारत हैं। कार्ट रूम और निवास स्थानों को सेनिटाईज़ किया जा रहा है और वायरस को फैलने से रोकने के बारे में जागरुक किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वकीलों और अन्य स्टाफ कर्मियों के लिये कल एक कार्यशाला का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें स्वाईन फ्लू के संबंध में जानकारी दी जायेगी।

आम तौर पर जनवरी-मार्च तथा जुलाई-सितम्बर के बीच के मध्य हर वर्ष स्वाईन फ्लू के मामले प्रकाश में आते रहते हैं और इस संबंध में जागरूकता की रोकथाम को सशक्त विकल्प है।