66 सालों में सुप्रीम कोर्ट में छह महिलाएं ही जज बनीं


नई दिल्ली। महिलाओं को हर तरफ पुरुषों की बराबरी का दर्जा देने की मांग हो रही है। मगर, भारतीय न्यायिक प्रणाली में उनके लिए बराबरी का रास्ता हमेशा से ही खुला रहा है। इसके बावजूद देश में ६६ साल बाद भी सुप्रीम कोर्ट में महज छह महिला जज ही हैं। नेशनल ज्यूडिशिसल एप्वाइंटमेंट कमीशन के चौकाने वाले खुलासे के बाद पांच जजों वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच का नेतृत्व जेएस खेहर ने किया। वह उन सुधारों की प्रकृति का परीक्षण कर रहे हैं, जो जजों के चयन के लिए जरूरी है। देशभर के हाई कोर्ट में ६११ पुरुष जजों की तुलना में महज ६२ महिला जज ही हैं। महिलाओं को १९२२ में प्रैव्âिटस करने की अनुमति मिली थी। वर्तमान में २४ हाई कोर्ट में से नौ में एक भी महिला जज काम नहीं कर रही है। वहीं, तीन हाई कोर्ट में एक-एक महिला जज ही हैं। १९५० में जब सुप्रीम कोर्ट की स्थापना हुई थी, तब से २२९ जजों में से महज छह ही महिला जज बनी हैं।