1990 से सांसदों के होटल में आवास पर 55 करोड़ का खर्च


नई दिल्ली। सरकार द्वारा सांसदों को बंगला उपलब्ध कराए जाने के बावजूद कई सांसद होटलों में रहते हैं जिनका केवल ठहरने एवं नाश्ते का चार्ज ९ हजार रूपये प्रतिदिन के करीब होता है। सरकार ने १९९०-९१ एवं २०१३-१४ के बीच सांसदों के पारगमन आवास पर लगभग ३५.७५ करोड़ रूपये जारी किया है। सूत्रों के मुताबिक आईटीडीसी संचालित होटलों एवं राज्य के गेस्ट हाउस का बिल भी २० से २५ करोड़ रूपये हो सकता है। बकाया राशि वर्ष दर वर्ष बढ़ती जा रही है। लोकसभा सचिवालय ने पहली बार होटल अशोक में रहने वाले सांसदों को अपने आधिकारिक आवास में जाने अथवा लक्जरी होटल में रूकने के लिए खुद बिल भरने की चेतावनी जारी की है। आईटीडीसी के दो होटल जनपथ एवं होटल सम्राट सांसदों को ट्रांजिट आवास उपलब्ध कराते हैं। दिल्ली निवासी वेदपाल के आरटीआई के जबाव में शहरी विकास मंत्रालय ने बताया कि ट्रांजिट आवास के खर्च का अलग से आंकड़ा नहीं रखा जाता है। फिर भी मंत्रालय प्रत्येक वित्तीय वर्ष के दौरान खर्च एवं सालाना विवरण रखता है। सूत्रों के मुताबिक आवास आवंटित किए जाने के बावजूद होटल अशोक में अब भी ठहर रहे सांसदों को नोटिस भेजा जाएगा।