112 साल बाद मौनी अमावस्या पर दुर्लभ संयोग


नईदिल्ली। मौनी अमावस्या पर इस बार ऐसा दुर्लभ संयोग अब अगले ११२ वर्ष बाद आएगा जब संगम में डुबकी लगाने पर वुंâभ पर्व से भी ज्यादा फल दिलाएगी। ज्योर्तििवद का कहना है वृष राशि के गुरु की मकर के सूर्य व चंद्रमा पर नौवीं दृाqष्ट पड़ने पर प्रयाग में वुंâभपर्व लगता है। जबकि २० जनवरी मंगलवार को सूर्य, चंद्रमा व बुध मकर राशि में रहेंगे, जिनके ऊपर कर्वâ राशि में उच्च के गुरु की दृाqष्ट पड़ेगी। जो वुंâभपर्व से भी अधिक कल्याणकारी योग है। वैवर्त पुराण व निर्णय िंसधु के अनुसार ऐसे योग में गंगा-यमुना में स्नान कर दान करने से एक हजार गाय के दान व एक हजार यज्ञ का फल प्राप्त होता है। श्रीधर्मज्ञानोपदेश संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी कहते हैं अमावस्या तिथि १९ की रात ९.२२ बजे लगकर मंगलवार की शाम ७.३२ बजे तक रहेगी. सूर्य, बुध व चंद्रमा २० जनवरी की सुबह ९.०३ पर मकर में आएंगे तभी अमावस्या का महत्व शुरू होगा।महाभारत के एक दृष्टांत में इस बात का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि माघ मास के दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है, वहीं पद्मपुराण में कहा गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने कि वे माघ मास में स्नान करने से होते है।