10वां ऐंटि-मिसाइल परीक्षण असफल


नईदिल्ली। भारत के दसवें ऐंटि-मिसाइल टेस्ट को कामयाबी नहीं मिल सकी है। राजधानी दिल्ली जैसे महानगरों के लिए दुश्मन के मिसाइली हमले से बचाव के लिए सुरक्षा छतरी जल्द मुहैया कराने का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट इस टेस्ट पर निर्भर था। इसकी तैयारी २००६ में शुरू की गई थी। ओडिशा के वीलर आइलैंड से ऐंटि-मिसाइल की अडवांस्ड किस्म का सोमवार को परीक्षण किया गया। छूटने के कुछ सेवंâड बाद ही पूरी मिसाइल बंगाल की खाड़ी में गिर गई। रक्षा मंत्रालय और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन इस मामले पर मौन हैं। लेकिन सूत्रों ने बताया कि टेस्ट के दौरान अडवांस्ड एयर डिपेंâस मिसाइल (एएडी) का एक सबसिस्टम समुचित ढंग से काम नहीं कर सका। वैसे आंकड़ों के विश्लेषण के बाद सही कारणों का पता चलेगा।
०परीक्षण का लक्ष्य
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अब तक दस टेस्ट कर चुका है जिसमें आठ कामयाब रहे हैं। अगला टेस्ट अहम सोमवार को हुए मिसाइल परीक्षण में निशाना एक इलेक्ट्रॉनिक टारगेट मिसाइल थी, जबकि अप्रैल के अंत में ही एक और परीक्षण कर वास्तविक वॉरहेड वाली दुश्मन की मिसाइल छोड़ी जाएगी। इस तरह यह परीक्षण युद्ध जैसे वास्तविक माहौल में होगा।
०दिल्ली होगा सेंटर
इस तरह के इंटरसेप्टर मिसाइल को बड़े शहरों की सुरक्षा के लिए तैनात करने की तैयारी नौ साल पहले २००६ में शुरू की गई थी। इसमें इस्तेमाल होने वाले रडार का विकास इस्राइली सहयोग से किया गया है। शुरू में भारत ने इस्राइल से दो ग्रीनपाइन रडार आयात किए थे, जिसकी तर्ज पर डीआरडीओ ने स्वोर्डफिश रेडार का विकास किया है।
०मिशन अब तक
४० किलोमीटर से नीचे की ऊंचाई पर दुश्मन की मिसाइल को गिराने के लिए अब तक छह एंडो एटमॉस्पेâरिक टेस्ट हो चुके हैं जबकि ८० किलोमीटर से अधिक ऊंचाई वाले तीन एग्जो-एटमॉस्पेâरिक टेस्ट हो चुके हैं। कुल दस में से अब तक आठ टेस्ट सफल हो चुके हैं। दसवां टेस्ट अडवांस्ड किस्म का बताया जा रहा था जिसमें वॉरहेड बड़ा लगाया गया था। इससे दुश्मन की मिसाइल के छूटने के बाद इसकी चेतावनी मिलने के बाद छूटने से लेकर टकराने तक की सारी प्रक्रिया स्वचालित होती है। यह दसवां परीक्षण एंडोएटमॉस्पेâरिक मिसाइल का था।