िंहदू में ही सर्वधर्म समभाव का भाव : मोहन भागवत


सागर । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत का कहना है कि िंहदू ही एकमात्र रास्ता है जो सबको साथ लेकर चलता है। िंहदू में ही सर्वधर्म समभाव का भाव है। भागवत ने करीब ५० मिनट के अपने भाषण में किसी भी राजनीतिक पार्टी या नेता का नाम लिए बिना अपनी बात रखी। मध्यप्रदेश के सागर में ५ दिन से चल रही आरएसएस की बैठक के अंतिम दिन भागवत एक सार्वजनिक सभा को संबोधित कर रहे थे।
भागवत ने कहा कि लोग संघ को जाने बिना कुछ भी धारणा बना लेते हैं या टिप्पणी करते रहते हैं। उन्होंने संघ को करीब से आकर जानने और देखने के लिए लोगों को आमंत्रित किया। भागवत ने भारत की तुलना इजरायल जैसे राष्ट्र से भी की। उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्रों ने लगभग एक ही समय आजादी पाई थी लेकिन आज इजरायल पूरे विश्व में अन्न प्रदाय कर रहा है लेकिन हम उतने विकसित नहीं हो पाए है। उन्होंने किसी भी नेता या पार्टी का नाम लिए बिना कहा कि जिन नेताओं की सरकारें रहीं, उनमें कुछ पैसा खर्च हुआ, कुछ विकास हुआ और कुछ पैसा भ्रष्टाचार में चला गया।