हाईकोर्ट के जज एक केस की सुनवाई में लेते हैं पंद्रह मिनट


नई दिल्ली । हाईकोर्ट के कामकाज को लेकर एक एनजीओ ने अध्ययन किया है। इसमें यह सामने आया है कि एक जज औसतन एक केस की सुनवाई में महज १५ मिनट का वक्त वे दे पाते हैं। इस आंकड़े से देश की न्यायपालिका में होने वाली देरी को लेकर बहस खड़ी कर दी है। रिपोर्ट में जजों की कमी को बकायदा दर्शाया गया है।
जानकारी के अनुसार अध्ययन बेंगलुरु के गैर सरकारी संगठन ‘दक्ष’ ने किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में सबसे आराम से काम करने वाले हाई कोर्ट जज एक केस को सुनने में १५-१६ मिनट का वक्त लेते हैं। वहीं, सबसे बिजी जज किसी मामले की सुनवाई में औसतन ढाई मिनट का समय दे पाते हैं। इस तरह किसी मुकदमे का पैâसला करने में जज औसतन तकरीब पांच से छह मिनट का वक्त लगाते हैं। उदाहरण के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जज के पास रोजाना औसतन १६३ लिस्टेड होते हैं, जिनकी सुनवाई पांच से साढ़े पांच घंटे का वक्त दिया जाता है। ऐसे में वहां के जज हर मुकदमे पर औसतन दो मिनट का समय ही दे पाते हैं। ठीक इसी तरह बड़ी तादाद में मुकदमों के लिस्टेड होने के कारण पटना, हैदराबाद, झारखंड और राजस्थान हाई कोर्ट के जज रोजाना हर मुकदमे पर दो से तीन मिनट का वक्त दे पाते हैं। इलाहाबाद, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उड़ीसा हाई कोर्ट में जज औसतन ४ से ६ मिनट का समय देते हैं। अध्ययन में जनवरी २०१५ से लेकर वर्तमान समय तक २१ हाईकोर्ट के १९ लाख मामलों और ९५ लाख सुनवाई का विश्लेषण किया गया।