हथियारों का सबसे बड़ा खरीददार है भारत


नई दिल्ली (ईएमएस) भारत दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीददार है। हम अपनी कुल रक्षा जरूरत का करीब ७० फीसदी आयात करते हैं। हथियारों के वैश्विक क्रय में भारत की हिस्सेदारी १४ फीसदी है। इसका अर्थ यह है कि रक्षा उपकरणों के मामले में भारत पूरी तरह से दूसरे देशों पर निर्भर है।
२०१६-१७ में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने रक्षा बजट में मामूली एक फीसदी बढ़ोतरी की. २०१६-१७ के लिए भारत का रक्षा बजट ३८.३२ अरब डॉलर (२,४९,०९९ करोड़ रुपये) का है जो पिछले साल के ३७.९६ अरब डॉलर के मुकाबले ज्यादा है. मोदी सरकार के पिछले दो सालों के दौरान रक्षा के क्षेत्र में `मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट को जबरदस्त तरीके से आगे बढ़ाने से अब उम्मीद है कि भारत की दुसरे देशों पर निर्भरता इस क्षेत्र में काम होगी। भारत अपनी जीडीपी का करीब २ फीसदी से अधिक हिस्सा रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्च करता है. लेकिन स्थानीय उत्पादन और सक्षम टेक्नोलॉजी तक पहुंच नहीं होने की वजह से भारत हथियारों की खरीद से काम चलाने के लिए मजबूर है.
२०११-१५ के बीच कुल बेचे गए हथियार में सबसे अधिक ३३ फीसदी हिस्सेदारी अमेरिका की रही. २००६-१० के मुकाबले अमेरिका के बड़े हथियारों की बिक्री में २७ फीसदी का इजाफा हुआ वहीं रूस की हथियार बिक्री में २८ फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
एशियाई देशों में हथियारों की खरीद का एक बड़ा पहलू चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षा और विस्तारवादी रणनीति है. चीन की र्आिथक ताकत में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और उसने दक्षिण चीन सागर में दावेदारी करना शुरू कर दिया है. चीन की इस मंशा की वजह से भारत, जापान और वियतनाम के रक्षा बजट में बढ़ोतरी हुई है.