स्वदेशी रक्षा उत्पादन वृद्धि सरकार का मुख्य लक्ष्य: र्पिरकर


नईदिल्ली।`मेक इन इंडिया’ के तहत अधिक से अधिक रक्षा उपकरणों का भारत में निर्माण किया जाना सरकार का मुख्य ध्येय है और मोदी शासन के पहले वर्ष में भारतीय विव्रेâताओं को दिये गए आर्डर में १३ प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। लोकसभा में फिरोज वरूण गांधी के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में वेंâद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर र्पिरकर ने कहा कि वर्ष २०१२-१३ के दौरान रक्षा उपकरणों की खरीद में वास्तविक व्यय ५८,७६८ करोड़ रूपये रहा जिसमें भारतीय विव्रेâताओं को ३२,४५५ करोड़ रूपये (५५.२३ प्रतिशत) के आर्डर दिये जबकि विदेशी विव्रेâताओं को २६,३१३ करोड़ रूपये (४४.७७ प्रतिशत) आर्डर दिये गए।
वर्ष २०१३-१४ के दौरान रक्षा उपकरणों की खरीद में वास्तविक व्यय ६६८५० करोड़ रूपये रहा जिसमें भारतीय विव्रेâताओं को ३१७६८ करोड़ रूपये (४७.५३ प्रतिशत) के आर्डर दिये जबकि विदेशी विव्रेâताओं को ३५,०८२ करोड़ रूपये (५२.४७ प्रतिशत) आर्डर दिये गए। वर्ष २०१४.१५ के दौरान रक्षा उपकरणों की खरीद में वास्तविक व्यय ६५५८२ करोड़ रूपये रहा जिसमें भारतीय विव्रेâताओं को ४०,५८९ करोड़ रूपये (६१.८९ प्रतिशत) के आर्डर दिये जबकि विदेशी विव्रेâताओं को २४,९९२ करोड़ रूपये (३८.११ प्रतिशत) आर्डर दिये गए। रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष २०१५-१६ के दौरान विदेशी विव्रेâताओं तथा भारतीय विव्रेâताओं को दिये गए आर्डर के संबंध में रक्षा पूंजीगत अधिग्रहण पर व्यय समेकित नहीं किया गसया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा सेनाओं के लिए पूंजीगत अधिप्रााqप्तयां, रक्षा अधिप्रााqप्त प्रक्रिया से प्रारंभ होती है जिसमें १५ वर्षीय दीर्घावधिक एकीकृत संदर्शी योजना, पंचवर्षीय सेना पूंजीगत अधिग्रहण योजना तथा र्वािषक अधिग्रहण योजना शामिल है। दीर्घावधिक एकीकृत संदर्शी योजना २०१२ से २०२७ में परिचालित है। र्पिरकर ने कहा कि दीर्घावधिक एकीकृत संदर्शी योजना में वैमानिकी, मिसाइलों, युद्ध सामग्रियों, युद्धक वाहनों तथा इंजीनियरी जैसे प्रौद्योगिकी क्षेत्र शामिल हैं और परियोजनाओं में चल रही वचनबद्धताओं को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को २०१५-१६ में राजस्व मद में आवंटन ६०११.०६ करोड़ रूपये और पूंजीगत आवंटन ६४८० करोड़ रूपये था। २०१६-१७ में संगठन को राजस्व मद में आवंटन ६,७२८.०५ करोड़ रूपये और पूंजीगत आवंटन ६८६५.७३ करोड़ रूपये था।