स्वतंत्रता सेनानियों की संपत्तियों को सरकार अधिग्रहित नहीं कर सकती


चेन्नई। यह निर्णय देते हुए कि सरकार किसी भी उद्देश्य के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और रक्षा कर्मियों की अचल और चल संपत्तियों को अधिग्रहित नहीं कर सकती, मद्रास हाईकोर्ट ने आदेश दिया है चेंगलपेट के निकट मराइमलाई नगर स्थित करोड़ों रूपये मूल्य की ७.८३ एकड़ भूमि स्वतंत्रता सेनानी के बच्चों को वापस की जाए।
जस्टिस सी.एस.करननन ने आदेश में कहा कि बिना सोच विचार के किये गये भूमि अधिग्रहण के वास्ते क्या महात्मा गांधी और उनके जैसे अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का त्याग को भुलाया जा सकता है। जस्टिस करनन ने कहा है कि स्वतंत्रता सेनानी, रक्षा कर्मी और उनके परिवार देश की १२५ करोड़ आबादी की सुरक्षा के लिए वंâधे से वंâधा मिलाकर खड़े हैं। ऐेसे में उनकी चल और अचल संपत्तियों को किसी की कीमत पर अधिग्रहित नहीं किया जा जाना चाहिए । गौरतलब है कि स्वतंत्रता सेनानी सुब्बइया उन पांच लाभान्वितों में से एक थे। जिन्हें आजादी के एक साल बाद ५० एकड़ भूमि आवंटित की गई थी। सुब्बैया के हिस्से में ७.८३ एकड़ भूमि आई थी। जिसका आदेश १९४८ में जारी हुआ था। सन १९७३ में सुब्बैदा की मौत हो गई थी और १९७४ में एक लाख लोगों के आवासीय प्लाट विकसित करने के नाम पर उसकी ७.८३ एकड़ भूमि अधिग्रहित कर ली गई। इसके १४ साल बाद १९८६ में अधिग्रहित भूमि के लिए २.६८ लाख की मुआवजा राशि घोषित की गई, और इस राशि को बच्चों में समान बंटवारा न होने के कारण एक सिविल कोर्ट में जमा करा दिया गया था। आज तक परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला है। सुब्बैया के बेटे एस. बाला सुब्रमण्यम ने थक हारकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें यह दावा किया गया कि २९ साल बाद भी उन्हीं का कब्जा है और जमीन खाली पड़ी है।