सौर उत्पादों से घट रहा है अंधेरा


नई दिल्ली । पर्यावरण बचाने की कोशिश में सौर ऊर्जा उत्पादों का इस्तेमाल न केवल पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों पर दबाव कम कर रहा है बाqल्क ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर सृजित करने में भी सहायक हो रहा है। कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व के तहत वंâपनियों की तरफ से हो रही यह कोशिश भी सरकार के लक्ष्यों तक पहुंचने में मददगार साबित हो रही है।
वेंâद्र के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रोत्साहन पर चलाई जा रही इन स्कीमों की मदद से वंâपनियां विभिन्न इलाकों में स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से सौर ऊर्जा उत्पादों का वितरण कर रही हैं। ऐसे ही एक कार्यक्रम के तहत कोका कोला फाउंडेशन ने बिहार के तीन जिलों को चुना है जहां महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सोलर लालटेन का वितरण किया जा रहा है।
इसके तहत बिहार के मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों में १४०० परिवारों के बीच इसका वितरण किया जा चुका है। सितंबर-अक्टूबर, २०१६ तक इन जिलों में फाउंडेशन ने २१०० सौर ऊर्जा उत्पाद वितरित करने का लक्ष्य रखा है।
इन जिलों में फाउंडेशन सेवा भारत नाम की स्वयंसेवी संस्था के साथ मिलकर काम कर रहा है। इस संस्था से जुड़ी और इन जिलों में काम कर रही कार्यकर्ता रुचि ने बताया कि संस्था और फाउंडेशन का उद्देश्य इन जिलों की महिलाओं को र्आिथक तौर पर आत्मनिर्भर बनाना है। बिजली के अभाव में महिलाओं के लिए घर में जीविका कमाने के लिए कुछ और काम करना संभव नहीं हो पा रहा था। इस कमी को दूर करने के लिए इन जिलों में सोलर लालटेन वितरित करने का पैâसला लिया गया। इन लालटेन की खरीद में वित्तीय सहयोग के लिए कोका कोला फाउंडेशन वर्ष २०१४ में आगे आया।
इन इलाकों में सोलर लालटेन वितरित करने से न केवल बिजली पर निर्भरता कम हुई बाqल्क किरोसिन की खपत पर भी लगाम लगाने में सफलता मिली। सेवा भारत के मुताबिक, सोलर लालटेन की मदद से पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ इन जिलों की महिलाओं की आय में भी २० फीसद तक की वृद्धि हुई है।