सेंसर बताएंगे सिंचाई के लिए पानी की खपत


रांची । भारत में छात्रों के एक समूह ने सिंचाई को तकनीक से जोड़ दिया है। यह तकनीक असामान्य है। इसमें खेतों में सेंसर लगाकर सिंचाई के लिए जरूरी पानी की खपत की ऑनलाइन जानकारी मिल सकेगी।
जानकारी के अनुसार टाटा स्टील के मैनेजमेंट ट्रेनी छात्रों ने यह तकनीक विकसित की है। यह तकनीक खेतों की िंसचाई के वैज्ञानिक जरूरतों का आकलन करती है, साथ ही खेतों को सींचने की स्मार्ट टेक्नोलॉजी भी प्रदान करती है। छात्रों ने इस टेक्नोलॉजी को नाम दिया है कस्टमाइज्ड इरिगेशन सिस्टम। खेतों को सींचने का यह सिस्टम सेंसर तकनीक पर वेंâद्रित है। किसानों की मदद को तैयार किए गए इस टेक्नोलॉजी को विकसित करने वाली टीम के ग्र्रुप लीडर अमित कुमार का कहना है कि इस टेक्नोलॉजी के तहत खेतों में विशेष रूप से तैयार सेंसर को जगह-जगह लगा देना पड़ेगा। ये सेंसर खेतों की नमी का आकलन करेंगे।
इस सेंसर से कस्टमाइज्ड इरिगेशन सिस्टम जुड़ा रहेगा जो खेतों की मिट्टी की नमी, पानी की मात्रा के बारे में सूचना भेजेगा। इसी सूचना के आधार पर सिस्टम यह तय करेगा कि खेत को कितने पानी की जरूरत है। इसके बाद सिस्टम खुद जरूरत के हिसाब से पानी सप्लाई की अनुमति पंप को तकनीकी डेटा के माध्यम से देगा। तब जाकर पानी खेतों में ऑटोमेटिक तकनीक से पंप किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में किसान के स्वयं खेत में उपाqस्थत होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे एसएमएस तकनीक भी जुड़ी रहेगी। खेतों में िंसचाई की ाqस्थति, पानी की जरूरत व सिस्टम से पानी खेतों में भेजने की सूचना समय-समय पर ऑटोमेटिक ही किसान तक पहुंच जाएगी। कस्टमाइज्ड इरिगेशन सिस्टम से खेतों में पानी की सप्लाई टेक्नोलॉजी के माध्यम से स्वत? मशीन के आकलन के आधार पर की जाएगी। खास बात यह है कि इस सिस्टम में फसल के प्रकार के आधार पर भी िंसचाई के लिए जरूरी पानी की मात्रा तय रहेगी। मतलब यह कि अगर खेत में धान की फसल है तो उसे कब कितना पानी चाहिए, कितनी नमी चाहिए, यह खुद सिस्टम में ही फीड रहेगा, जिसके आधार पर पानी की सप्लाई होगी।