सुको ने गोद लेने के नियम तय करने के आदेश दिए


नई दिल्ली। बच्चों को गोद लेने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने वेंâद्र और राज्य सरकारों को नए कानून के तहत जरूरी नियम कायदे और दिशा-निर्देश तय करने के आदेश दिए हैं। इसका मकसद बच्चों के कल्याण और उनके हितों की रक्षा सुनिाqश्चत करना है। प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जिसमें तीन जज शामिल है कहा है कि देश के अंदर या बाहर गोद लिए जाने वाले बच्चों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। साथ ही गोद लिए जाने की प्रक्रिया भी पारदर्शी होनी चाहिए। देश में कथित रूप से सक्रिय गोद लेने वाले रैकेट की सीबीआइ जांच से पीठ ने इंकार कर दिया। अदालत ने जनहित याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन एडवेट फाउंडेशन से कहा कि वह किसी खास मामले में किसी विशेष आरोप की बात करें। आप सभी मामलों के लिए सीबीआइ जांच की मांग नहीं कर सकते। इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। सरकार हाल ही में जुवेनाइल जाqस्टस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, २०१५ लाई है जो इस साल १५ जनवरी से लागू हुआ है। माना जा रहा है कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और िंपकी आनंद ने कहा, बच्चों के अधिकार समझौते-१९८९ के तहत सरकार नया जुवेनाइल कानून लाई है। इस कानून में उन सभी मुद्दों का ध्यान रखा गया है जो याचिका में उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देशभर की जेलों में हिसक घटनाओं और अप्राकृतिक मौतों पर िंचता व्यक्त की। अदालत ने टिप्पणी की कि स्टॉफ की कमी की वजह से राज्य लोगों को जेल में मरने के लिए नहीं छोड़ सकते। जाqस्टस एमबी लोकुर और एनवी रमन्ना की पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब उन्हें बताया गया कि राज्य सरकारों और जेल अधिकारियों का दावा है कि वे अपर्याप्त स्टॉफ की वजह से हिसक घटनाओं पर नियंत्रण पाने में असमर्थ हैं। इस पर पीठ ने कहा कि यह १५० करोड़ लोगों का देश है, इसके बावजूद उन्हें जेलों के लिए स्टॉफ नहीं मिल रहा। वे क्या चाहते हैं। क्या पूरा देश जेलों के लिए काम करे? स्टॉफ की कमी की वजह से राज्य लोगों को जेल में मरने के लिए नहीं छोड़ सकते।
वेंâद्र को निर्देश देते हुए पीठ ने कहा है कि वह राज्यों के पुलिस महानिदेशकों के साथ समन्वय कर जेलों में स्टॉफ की कमी का विवरण दाखिल करें। साथ ही यह भी बताएं कि जेलों में कितनी अप्राकृतिक मौत हुई हैं। पीठ ने यह निर्देश तब दिया जब न्यायमित्र गौरव अग्रवाल ने अदालत को बताया कि जेलों में ज्यादातर अप्राकृतिक मौतें आत्महत्या, वैâदियों को लाने-ले जाने के दौरान हिसा या आपसी दुश्मनी की वजह से होती हैं। हालांकि वेंâद्र के वकील ने अदालत को बताया कि एक सीमा तक ही राज्यों पर इस कारण से दबाव डाला जा सकता है क्योंकि यह राज्यों का विषय है।