सिर में चोट से पीड़ित आधे मरीजों की मौत गरीबी से – एम्स


नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के आंतरिक अध्ययन में पाया गया कि सिर में गंभीर चोट से पीड़ित आधे मरीजों की एम्स के ट्रामा सेंटर से छुट्टी के छः महीने बाद गरीबी की वजह से मौत हो जाती है। अक्सर वे सभी गंभीर सिर अथवा स्पाइन चोट के बाद जड़ अवस्था में आ जाते हैं अर्थात उनका मस्तिष्क निष्क्रिय हो जाता है तथा परिवार के लोग मरीज के लिए आवश्यक देखभाल एवं पोषक पदार्थ उपलब्ध नहीं करा पाते हैं। हास्पाइस (उपचार के लिए रूकने) सुविधाओं पर जोर देते हुए कहा गया है कि भारत में ऐसी सुविधाओं का अभाव है। चिकित्सकों ने न्यूरोसर्जरी विभाग से २००८ से लेकर पिछल पांच वर्षों में डिस्चार्ज किए गये २५०० मरीजों पर अध्ययन किया गया। ये लोग राजधानी में गांवों से काम की तलाश में आते हैं एवं आमतौर पर परिवार में कमाई करने वाला एक ही व्यक्ति होता है। पीड़ित के परिवार में तीन या चार घंटे बच्चे होने पर उनकी पत्नियां उन्हें जीवित रखने के लिए सुविधाओं हेतु पर्याप्त पैसे की व्यवस्था नहीं कर पाती हैं।