सहयोग राशि को लेकर दो फाड़ हुई हरियाणा सरकार


– जाट आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों को मुआवजा देने का मामला
चंडीगढ़। हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के चलते जहां प्रदेश की जनता जाट और गैर जाट खेमे में बंट गई है, वहीं हरियाणा सरकार भी दो फाड़ हो गई है। कृषि मंत्री एवं जाट नेता ओपी धनखड़ ने जहां ट्वीट करके आंदोलन में मारे गए व्यक्तियों को मुआवजा के रूप में दस लाख रुपए तथा सरकारी नौकरी दिए जाने की घोषणा कर डाली, वहीं गैर जाट एवं पंजाबी नेता स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इस मुद्दे पर खफा होकर इस्तीपेâ की पेशकश कर डाली। विज का दावा है कि मंत्रिमंडल की बैठक में इस तरह का कोई पैâसला नहीं हुआ था। सरकार आंदोलन के दौरान जाट आंदोलनकारियों की लूट का शिकार हुए लोगों को मुआवजा देने का पैâसला करे।
जाट आंदोलन के चलते प्रदेश की करीब ढाई करोड़ जनता पहले से ही दो फाड़ हो चुकी हैं। आंदोलन के चलते प्रदर्शनकारियों द्वारा रोहतक, झज्जर, सोनीपत व जींद आदि जिलों में चुन-चुनकर जाति विशेष के लोगों को लूटा गया। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मंत्री कविता जैन तथा सांसद रमेश कौशिक के प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचाया था। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज शुरू से ही सरकार से आंदोलनकारियों के खिलाफ सख्ती से निपटने की मांग करते आ रहे हैं। विज ने ट्वीट करके कहा था कि वह आंदोलनकारियों की लूट का शिकार हुए लोगों को मुआवजा दिलवाने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत करेंगे।
मंत्रिमंडल की बैठक में इस मुद्दे पर जब चर्चा हुई तो जाट नेता वैâप्टन अभिमन्यु और ओ.पी.धनखड़ ने आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी तथा दस-दस लाख रुपए मुआवजा प्रदान किए जाने की मांग उठाई। दूसरी तरफ विज, कविता जैन तथा अन्य गैर जाट मंत्रियों ने आंदोलनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए लूट का शिकार हुए लोगों के पुर्नवास की मांग उठाई, जिसके चलते इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। सूत्रों की मानें तो विज समेत अन्य कई मंत्रियों ने आंदोलनकारियों को मुआवजा दिए जाने का विरोध किया। मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने हस्तक्षेप करते हुए विज तथा अन्य गैर जाट मंत्रियों को बैठक के लिए बुलाया है।