समलैंगिकता को लेकर मोदी को लिखा पत्र


कोलकाता। समलैंगिकता का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। २०१३ में सर्वोच्च न्यायालय में इसे अपराध करार दिए जाने के बाद वेंâद्र सरकार ने भी याचिका दायर की है। संसद में भी बहस हुई, लेकिन कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला। अब कोलकाता के एक समलैंगिक पुरुष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर अपना दर्द बयां किया है। लिखा है कि सार्वजनिक स्थल पर अपने साथ का हाथ पकड़ने में मुझे डर लगता है। यह पत्र इस प्रकार है –

डियर प्राइम मिनिस्टर,
यह चिट्ठी लिखते समय मेरे आसपास की दुनिया बहुत सुंदर नजर आ रही है। मां नाश्ता परोस रही है। पिता बाहर धूप में बैठकर चाय पी रहे हैं, अखबार पढ़ रहे हैं। मैं प्रâीलांस फिल्ममेकर और कलाकार हूं। बहरहाल, इन तमाम बातों में एक अधूरापन है। यह मुद्दा मेरा या मेरे परिवार का नहीं है। दायरा इससे भी बढ़कर है। सर, मैं गे (समलैंगिक) हूं। मैं कोलकाता के शोभाबाजार में पला-बढ़ा हूं। यह इलाका आज भी कॉफी शॉप्स, नाइटक्लब, मॉल्स से गुलजार है। यहां बच्चों को रबींद्र संगीत सिखाया जाता है। छोटा था तब मां ने मेरे लिए बहुत सपने देखे। मिशनरी स्वूâल में पढ़ने भेजा। जब मैं १२ साल का था, तब मुझे अहसास हुआ है कि मैं अपने पुâटबॉल प्रेमी और सलमान खान व्रेâजी प्रैंâड्स से अलग हूं।
तब से मैंने िंजदगी अपने हिसाब से गुजारी। आगे चलकर मैंने अहमदाबाद के नेशनल इांqस्टटयूट ऑफ डिजाइन के ग्रेज्युएशन किया। वहां मैंने अपनी डिप्लोमा फिल्म के लिए शोभाबाजार के सेट पर एलजीबीटी आधारित एनिमेटेड फिल्म बनाने का पैâसला किया। यह फिल्म दो साल पहले बनी थी। लेकिन आज हालात बदल गए हैं।
देश में एलजीबीटी आंदोलन काफी पिछड़ गया है। २०१३ में सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदी लगाई। मैंने भी कोलकाता की सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।
बीते दिनों मुझे उस समय बहुत दुख हुआ जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गे सेक्स पर प्राइवेट बिल संसद में पेश करना चाहा, लेकिन अनुमति नहीं मिली। यही नहीं, संसद में ही थरूर का मजाक भी उड़ा। कुछ सांसदों ने कहा, थरूर गे हैं, इसलिए बिल पास करवाने की इतनी जल्दी है। यह असहिष्णुता है। जब जनता के चुने प्रतिनिधि इस तरह मजाक उड़ते हैं तो हमें बहुत दुख होता है। हालांकि कुछ अच्छे काम भी हुए हैं। राज्यसभा में ट्रांसजेंडर के अधिकारों वाला बिल पास हुआ है। कोलकाता पुलिस में ट्रांसजेंडरों की भर्ती शुरू होने वाली है। पाqश्चम बंगाल में दुनिया की पहले ट्रांसजेंडर िंप्रसिपल है। दुर्गा पूजा में ट्रांसजेंडर की सेवाएं ली जा रही हैं। ये बदलाव बहुत महत्वपूर्ण हैं।
इतना सब होने के बाद भी मेरे मन में बहुत डर है। मुझे सार्वजनिक स्थल पर अपने पार्टनर का हाथ पकड़ने से पहले दो बार सोचना पड़ता है। ऐसा लगता है मानो सरकार कह रही हो, आप काम कर सकते हैं, स्वूâलो में पढ़ा सकते हैं, दुर्गा पूजा में हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन प्यार नहीं कर सकते?
मैं जानता हूं कि इस संबंध में जागरूकता पैâसले का काम अकेला आपका नहीं है। यह हर भारतीय की जिम्मेदारी है। मैं आपको ३४ वर्षीय ट्रांसजेंडर सेक्स वर्वâर बिनी की कहानी सुनता हूं। साउथ कोलकाता में पुलिसवाले उससे खुले आम छेड़छाड़ करते हैं। वे जानते हैं कि एक नागरिक के तौर पर बिनी के पास कोई अधिकार नहीं हैं। मैं आपसे पूछता हूं कि भारत में गे सेक्स गैरकानूनी क्यों होना चाहिए? मैं बात करने को तैयार हूं, लेकिन क्या आप सुनने को तैयार हैं?