‘शपथ’ में दिखा देश में ‘शौचालय’ का सच


नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में निर्मित लड़कियों के लिए करीब साठ हजार शौचालयों की सुविधा के बाद भी सच्चाई इससे अलग हैं। महिला दिवस पर वित्तचित्र ‘शपथ’ के जरिये देश में शौचालय का यथार्थ उजागर हुआ है। देश की कुल आबादी १२५ करोड़ का ६० फीसदी हिस्सा आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर है, जबकि ये आंकड़ा पड़ोसी देश चीन में ४ और बांग्लादेश में सिर्पâ ३ फीसदी का है। फिल्मकार विनोद कापड़ी के निर्देशन में बनी डॉक्यूमेंट्री शपथ का तानाबाना एक सच्ची घटना और उसके बाद आ रहे बदलाव पर बुना है।
डॉक्टूमेंट्री फिल्म शपथ में यूपी के कुशीनगर के गांव खेसिया की ६ महिलाओं की कहानी दिखाई गई। ६ महिलाओं ने शादी के कुछ ही समय बाद ससुराल छोड़ दिया था क्योंकि उनके ससुराल में शौचालय नहीं था। इस डॉक्यूमेंट्री को देखने के बाद वेंâद्रीय मंत्री राम कृपाल ने माना कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियान के नतीजे मकसद के मुताबिक नहीं मिले हैं। वेंâद्र सरकार ने २०१९ तक हर घर में शौचालय का दावा किया गया है। डॉक्यूमेंट्री प्रसारण के बाद हुई बहस में वेंâद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने खुले में शौच के पीछे कुछ लोगों की मानसिकता को भी जिम्मेदार ठहराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में संसद में कहा था कि करीब साठ हजार लड़कियों के लिए टॉयलेट बनवाए जा चुके हैं। जबकि डॉक्यूमेंट्री में ये गंभीर सम्सया अभी भी देशभर में जस की तस बनी हुई है।