विद्यालय परीक्षा समिति में है भ्रष्टाचारः शाही


पटना। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति में भ्रष्टाचार है, गड़बड़ियां हैं। शुक्रवार को विधान परिषद में संजय कुमार िंसह व दिलीप कुमार चौधरी के ध्यानाकर्षण में शिक्षा मंत्री पीके शाही ने समिति में गड़बड़ियां स्वीकारी। मंत्री अनुदानित माध्यमिक व इंटर महाविद्यालयों को अनुदान देने के सवाल का जवाब दे रहे थे।
कहा कि सदस्यों की भावना से हम सहमत हैं। कतिपय लोकसेवकों ने मान लिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त रहना उनका संविधानप्रदत्त मौलिक अधिकार है। पैसे के बल पर कुछ गलत काम समिति में हो रहे हैं। लेकिन, पैसे की लेन-देन में दो पक्ष होते हैं। एक पैसा लेने वाला, दूसरा देने वाला। दहेज प्रथा को रोकने को लंबे समय से कानून है पर क्या यह रुका है। केवल कानून बनाने से भ्रष्टाचार को समाप्त नहीं किया जा सकता। समाज के लोगों को जागरूक होना होगा। यह सही है कि पहले कोई गड़बड़ियां नहीं थी, पर जैसे ही अनुदान की प्रक्रिया शुरू हुई, सब शुरू हो गया। इससे पहले संजीव िंसह ने कहा कि परीक्षा समिति पैसा उगाही का वेंâद्र बन गया है।
०प्रबंध समिति न होने से अनुदान देने में विलंब
माध्यमिक व इंटर महाविद्यालयों को अनुदान देने के मसले पर मंत्री ने कहा कि ७८० माध्यमिक विद्यालय में से २६२ और ५०८ इंटर महाविद्यालय में से २७३ को अनुदान दिया जा चुका है। ४८ मामले न्यायालय में हैं। प्रबंध समिति न होने के कारण अनुदान देने में विलंब हो रहा है। ४३२ माध्यमिक व ४१८ इंटर महाविद्यालयों में प्रबंध समिति गठित हो गई है। सरकार की कोशिश है कि १५ अप्रैल के पहले पात्रता रखने वालों को २०१० तक का बकाया अनुदान दे दिया जाए। २०१० से २०१४ की अवधि का बकाया अनुदान वित्तीय संसाधन के अनुसार एकमुश्त या किस्तों में दिया जाएगा। शैक्षणिक वैâलेंडर की प्रक्रिया चल रही है और २०१५-१७ में इसे लागू कर दिया जाएगा। शिक्षकों की सूची वंâप्यूटरीकृत हो रही है।