वाई फाई का विकल्प बन सकता है लाई-फाई


– एलईडी बल्ब से इस्तेमाल हो सकेगा इंटरनेट
नई दिल्ली। वाई-फाई से प्रतिस्पर्धा के लिए तकनीक बनकर तैयार है। इसे लाई-फाई नाम से पुकारा जाएगा। यदि लाई-फाई प्रचलन में आया तो वह दिन दूर नहीं होंगे जो एलईडी बल्ब की मदद से इंटरनेट इस्तेमाल हो सके। इससे जहां इंटरनेट चलेगा वहीं बिजली भी मिल सकेगी।
जानकारी के अनुसार यूनिर्वििसटी ऑफ एडिनबर्ग के प्रोपेâसर हराल्ड हास ने साल २०११ में लाई-फाइ (लाइट-पेâडलिटी) शब्द का इस्तेमाल किया था। हास ने विप्रो के इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी वैंâपस में इस नई टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने एलईडी बल्ब से वेब एक्सेस करके इंटरनेट के एक वीडियो को लैपटॉप में भेजकर दिखाया। प्रोपेâसर हास ने कहा कि लाई-फाई डिस्राqप्टव टेक्नोलॉजी है, जो बिजनेस मॉडल को बदल सकती है। यह नए अवसरों को पैदा कर सकती है और साल २०२२ तक ११३ अरब डॉलर की इंडस्ट्री बन सकती है। उन्होंने कहा कि रेडियो प्रâीक्वेंसी स्पेक्ट्रम वायरलेस डाटा कम्युनिकेशन की ग्रोथ की दर को देखते हुए पर्याप्त नहीं है। विजिबल लाइट स्पेक्ट्रम का दायरा अधिक विस्तृत है। लाई-फाई के लिए लाइट स्पेक्ट्रम का उपयोग पारंपरिक वायरलेस कम्युनिकेशन की समस्याओं जैसे स्पेक्ट्रम की कमी और नेटवर्वâ में बाधा पर काबू कर सकता है।
लाई-फाई टेक्नोलॉजी में जिस किसी के पास लाइट है, वह इंटरनेट का उपयोग कर सकता है। इस सिस्टम में यूजर एक लाइट सोर्स से दूसरे लाइट सोर्स में बिना नेटवर्वâ कनेक्शन के टूटे जा सकता है। रात के समय में फोटान्स की स्ट्रीम निम्नतम स्तर पर पहुंच जाती है, जो कि विजिबल लाइट (दृश्य प्रकाश) नहीं पैदा करेगी, लेकिन इतनी रोशनी देगी, जिससे डाटा वैâरी हो सके। प्रोपेâसर हास ने बताया कि लाई-फाई को वाई-फाई से प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि यह वाई-फाई की जगह ले लेगा।