लिव इन रिलेशनशिप का मामला रेप के दायरे से बाहर


नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि लिव इन रिलेशनशिप के मामले को रेप के दायरे से बाहर रखा जाए। दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में १८ फरवरी को सुनवाई करेगा। हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर कहा है कि सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि लिव इन रिलेशनशिप के मामेल को रेप के दायरे से बाहर रखा जाए। ऐसे मामले में जब एक पार्टनर दूसरे पर आरोप लगाते हैं तो मामला रेप (धारा-३७६) में दर्ज नहीं होना चाहिए बल्कि ऐसे मामले में धोखाधड़ी (आईपीसी की धारा-४२०) का मामला बनाया जाना चाहिए। इस मामले में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर कहा है कि रेकॉर्ड देखने से साफ है कि कई मामलों में कोर्ट आरोपी को इसलिए बरी करती है कि महिला ने झूठे मुकदमे दर्ज कराए थे। करीब ७० फीसदी रेप के मामलों में आरोपी दोषी करार नहीं दिया जाता जबकि केस के दौरान उनके परिजनों को भारी सामाजिक बदनामी झेलनी पड़ती है। अदालत में अर्जी दाखिल कर यह भी कहा गया है कि केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह उन लोगों के संवैधानिक अधिकार को प्रोटेक्ट करे जो रेप केस में बरी हुए हैं। ऐसे लोगों को मुआवजा दिया जाना चाहिए और कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए। झूठा फंसाए जाने की संभावना के मद्देजनर पुलिस को शिकायत मिलने के बाद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं करना चाहिए बल्कि इस मामले में जांच होनी चाहिए साथ ही मेडिकल रिपोर्ट देखे जाने के बाद ही आरोपी को अरेस्ट किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अपनी अर्जी में यह भी कहा कि सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह वैसी वेबसाइट्स को ब्लॉक करें जो ऑब्जेक्शनेबल मटीरियल दिखाती हैं।