लिंग परीक्षण के विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार


जालंधर। सुप्रीम कोर्ट ने लिंग परीक्षण के विज्ञापनों पर फटकार लगाई है। इस संबंध में प्रचार रोकने याचिका लगी है। जिसमें विभिन्न सर्च इंजन याहू, गुगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसे दूसरी वंâपनियों से जवाब मांगा था। जिसमें विज्ञापन रोकने की बात से इनकार कर दिया था। इस बात पर सुप्रीम कोर्ट ने वंâपनियों के साथ-साथ केन्द्र सरकार को नीति बनाने के आदेश दिए है।
जानकारी के अनुसार न्यायर्मूित दीपक मिश्रा व न्यायर्मूित आर भानुमति की पीठ ने वेबसाइटों पर िंलग परीक्षण के विज्ञापन रोकने की साबू मैथ्यू जार्ज की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए। जब वंâपनियों ने विज्ञापन रोकने में असमर्थता जताते हुए कहा कि वे इस पर रोक नहीं लगा सकते हैं। वे तो जैसे ही कोई विज्ञापन आता है उसे ब्लाक कर देते हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि वे ये कह कर नहीं बच सकते कि वे मध्यवर्तीय संस्थाएं हैं और यहां के कानून उल्लघन होने पर कुछ नहीं कर सकते। कोर्ट ने वेंâद्र सरकार से कहा कि वह ऐसे विज्ञापनों को रोकने के बारे में कोई रास्ता निकाले। इस पर वेंâद्र की ओर से पेश सालिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कोर्ट को बताया कि सरकार दस दिन के भीतर तकनीकी विशेषज्ञों के साथ इस मसले एक बैठक करने वाली है। कोर्ट ने याहू, गुगल और माइक्रोसाफ्ट को निर्देश दिया कि वे सरकार द्वारा बुलाई जानी वाली बैठक में भाग लें और अपने सुझाव वहां रखें। कोर्ट ने कहा कि उसके बाद कोर्ट में मैमोरेन्डम दाखिल कर बताया जाए कि ऐसे विज्ञापनों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की सुनवाई २५ जुलाई तक के लिए टाल दी।