लाला लाजपत राय जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र का स्मरण


नईदिल्ली। पंजाब केसरी के नाम से विख्यात महान क्रांतिकारी लाला लाजपत राय की जयन्ती पर कृतज्ञ राष्ट्र उनका स्मरण कर रहा है। लाला जी का जन्म २८ जनवरी १८६५ को हुआ। १८९२ में उन्होंने लाहौर में वकालत शुरू की। १८८६ में डी.ए.वी. कॉलेज के अध्यापक तथा अवैतनिक मंत्री बनाए गए। १९०१ में पंजाब की शिक्षा समिति की नींव डाली और जगराओं में अपने पिता के नाम पर राधाकृष्ण हाई स्वूâल तथा पंजाब में अनेक स्थानों पर प्राइमरी स्वूâल खुलवाए। १८९६ में उत्तरी भारत , १८९९ में राजपूताना और १९०७-०८ में बिहार तथा युक्त प्रांत में पड़े अकाल में उन्होंने जी जान से अकाल पीड़ितों की सेवा में जुट गए। १८८८ में पहली बार इलाहाबाद-कांग्रेस में साqम्मलित हुए। वहां कौंसिल सुधार के प्रस्ताव पर प्रभावी भाषण के बाद कांग्रेस की ओर से औद्योगिक प्रदर्शनियां शुरू हुर्इं। १९०६ व १९११ में लाला जी कांग्रेस-डैपुटेशन के सदस्य बनकर इंगलैंड गए। १९१२-१३ में गांधी जी ने जब दक्षिण अप्रâीका में सत्याग्रह आरंभ किया तो उसके लिए लाला जी ने पंजाब से ४० हजार रुपए इकट्ठा किए थे। १९२० में गांधी जी के असहयोग आंदोलन पर विचार करने के लिए कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन के सभापति बनाए गए। १९२६-२७ में जब देश में शासन सुधार की मांग का आंदोलन हुआ तो ब्रिटिश सरकार ने भारतवासियों को बुलावा देने के लिए सर जान साइमन की अध्यक्षता में एक कमीशन की नियुक्ति की। इस पर १९२८ में हुए साइमन कमीशन केभारत का दौरा का एक स्वर में विरोध किया गया क्योंकि इसमें कोई भारतीय प्रतिनिधि नहीं था। ३० अत्तूâबर,१९२८ को साइमन कमीशन लाहौर पहुंचा। लाहौर में इस दिन धारा १४४ लगा दी गई थी। जगह-जगह पर पुलिस का पहरा था। कांग्रेस और जनता ने साइमन कमीशन का बहिष्कार किया। अत: लाहौर में भी ६० वर्षीय लाला लाजपत राय के नेतृत्व में साइमन कमीशन के विरोध में उसके बहिष्कार का जुलूस निकाला गया। पुलिस ने जुलूस पर लाठियां बरसानी शुरू कर दीं, लाला जी की छाती पर भी लाठियां पड़ने लगीं, िंकतु वह अडिग छाती पैâलाए सब कुछ सहन करते रहे। उसी समय रायजादा हंसराज ने आगे बढ़कर लाठियों का प्रहार अपने ऊपर लेना शुरू कर दिया, फिर भी लाला जी को बहुत चोट आई। उसी दिन शाम को लाला जी ने एक सभा में भाषण देते हुए कहा था कि मेरे ऊपर किया गया लाठी का एक-एक प्रहार ब्रिटिश साम्राज्य के कफन की कील बनेगा। इन्हीं घातक चोटों के चलते १७ नवम्बर, १९२८ को प्रात: ७ बजे लाला जी शहीद हो गए। लाला लाजपत राय न केवल पंजाब अपितु सम्पूर्ण भारतवर्ष की एक महान शक्ति थे।